युद्ध
युद्ध सदा देता हमें, गहरे त्रासद घाव।शांति अथवा युद्ध में, करिए उचित चुनाव। आम नागरिक झेलते, महायुद्ध का दंश।होते सैनिक
Read Moreनूतन सूर्य उजास में, मत छोड़ो तुम आस। सतगुरु चरनन सौंप सब, करो नवीन प्रयास।। इसका उसका कुछ नहीं, सब
Read Moreफागुन बैठा देखता, खाली है चौपाल।उतरे-उतरे रंग है, फीके सभी गुलाल॥ सजनी तेरे सँग रचूँ, ऐसा एक धमाल।तुझमे ख़ुद को
Read Moreहोली के त्यौहार में, ऐसी उठे तरंग।तन-मन में जो प्यार की, भर दे ख़ूब उमंग॥ आँगन-आँगन रंग हो, हो रंगीला
Read Moreकीर्ति जिसकी फैलती रमेश चारों ओरउनके खिलाफ ना मचे कोई सा भी शोर करता जो भी आदमी परिश्रम ही भरपूरउसके
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