दोहे
बनती बहुत मजबूरियां, बना तमाशा देत।आज कल शादी प्रथा, करती मटियामेट।। जाना तो माना नहीं, कर खर्चीला विवाह।जीना दूभर ख़ुद
Read Moreबिना युद्ध के देश ने, मार लिया मैदान। दुश्मन की तो छोड़िए, दुनिया है हैरान।।पता हमें भी तब चला, आँख खुली
Read Moreवीर सिपाही देश के, रक्षा में तैनात। सक्षम चौकस शूर वे, करे तेज आघात।। राष्ट्र प्रेम की लौ जले, हो
Read Moreलक्ष्य अधूरा ही रहा, मन में रहा मलाल।मिल जाती कुछ छूट तो, करते बहुत कमाल।।लक्ष्य अधूरा ही रहा, चूक गई
Read Moreहो ममता की नींव पर, घर का पक्का रंग।मगर दरारें जब पड़ें, बिखरे रिश्तों संग।। रिश्तों की दीवार पर, लगे
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