मुक्तक
होली मस्ती लेकर आई,खेल रहे कन्हाई।बरसाने से राधारानी,दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ,मुखड़े हैं रंगीन,रंग-अबीरों की आभा तो,सारे ब्रज में छाई।। खेल
Read Moreकीर्ति जिसकी फैलती रमेश चारों ओरउनके खिलाफ ना मचे कोई सा भी शोर करता जो भी आदमी परिश्रम ही भरपूरउसके
Read Moreफागुन आया देह में,जागी आज उमंग।मन उल्लासित हो गया,फड़क उठा हर अंग।। फागुन लेकर आ गया,प्रीति भरा संदेश।जियरा को जो
Read Moreरंगों के त्यौहार में , है गुलाल अनुरोधहोली से डरना मना, सुन नादान अबोध। होली हँस के खेलना, सिखलाता है
Read Moreपावन परिणय को हुए, पूर्ण वर्ष पच्चीस।हम दोनों के मध्य है, तालमेल छत्तीस।। कटे वर्ष पच्चीस हैं, पति उपाधि से
Read Moreऋतु परिवर्तन पर्व है, सूर्य चाल आधार।आहट सुनो बसंत की, खिचड़ी का त्योहार।रंग-रूप बदलाव का, अद्भुत उत्सव पर्व-भारत की पहचान
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