मुक्तक/दोहा

मुक्तक/दोहा

सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश

मात्र महाभारत नहीं, युद्धों का इतिहास।सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश॥ कर्ण-शकुनि की चाल ने, बढ़ाया मन में द्वेष।दुर्योधन के हठ

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मुक्तक/दोहा

बाल कविता – पापा संग सैर

पापा संग जब घूमता, हँसता-हँसता लाल।उसकी प्यारी मुस्कान से, खिल उठता हर हाल॥ नन्हे-नन्हे पाँव में, सपनों की उड़ान।हँसते-गाते सीखता,

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