मुक्तक
जब साथ आते चार लोग,शमशान जाते चार लोग।राम नाम सत्य है बताते,मिल जाते जब चार लोग। सत्य का गुंजायमान करते,जिनका
Read Moreरोटी की मजबूरियाँ, छीन गई पहचान,बचपन बोझा ढो रहा, सूना हर अरमान॥ हाथों में गर कलम हो, लिखते नए विचार,आज
Read Moreदोषारोपण कर रहे, अब अपने ही लोग।तेजी से है बढ़ रहा, कोरोना जस रोग।दोषी भी हम आप हैं, देख रहे
Read Moreमुस्कानों की ओट में, छुपा हुआ अवसाद।हर रिश्ता अब बन गया, मतलब का संवाद॥ अपने ही जब दे गए, दिल
Read Moreजन्मदिवस हनुमान का, हर्षित सीता राम |बिगडे़ काम संवारता, है हनुमत का नाम |भक्त अनोखा हो गया, सिया राम का
Read Moreठोकर खाकर भी उठा, हार न थी मंजूरतेज भाग कर मिल गयी, मंजिल जो थी दूर एक पैर जब कट
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