अटक गई है शाम रे
ढली शाम ने छेड़ दी, यादों वाली तान।सूने मन के द्वार पर, लौटे बीते गान॥ पतझर आया पेड़ पर, झरते
Read Moreढली शाम ने छेड़ दी, यादों वाली तान।सूने मन के द्वार पर, लौटे बीते गान॥ पतझर आया पेड़ पर, झरते
Read Moreकुदरत से बढ़कर नहीं, कोई मायाजालकब किस घड़ी ये कर दे, सूखा बाढ़ अकाल जब भी आते द्वार पर, आप
Read Moreकुछ मुक्तक- 461. उड़ान जितनी चाहो भरो #उड़ान,मन में तनिक न हो अभिमान,नजर धरा पर, ध्यान लक्ष्य पर,यही है गुण
Read Moreहम तो पत्थर हैं बस नींव में जड़े जायेंगे।ठुकराइये मत हम सभी के काम आयेंगे।माना कि निर्जीव हैं अपनी ख़बर
Read Moreडूबे सब निज स्वार्थ में, झूठी तेरी आस। अब तो लगते हैं सभी, सड़ी हुई सी घास।। सावधान रहिए सभी,
Read Moreदोषारोपण से भला, मिले कौन सा ताज।दुनिया को बतलाइए, जो भी इसका राज।नाहक देते दिल दुखा, निज घमंड में चूर-इससे
Read Moreकुछ मुक्तक- 451.#स्वतंत्र #स्वतंत्र होना सौभाग्य है, रखना इसे सहेज,खून पसीने से मिले, पड़े लुटाना तेज,स्वतंत्रता की राह में, आते
Read Moreसावन आया द्वार पर, भीगी मन की पीर।सूनी पलकों में बसी, प्रियतम की तस्वीर॥ झूला सूना डाल पर, सूनी है
Read Moreसावन में है तीज का, एक अलग उल्लास |प्रेम रंग में भीग कर, कहती जीवन खास | | जैसे सावन
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