दोहा
माना मैं तो मूढ़ हूँ, तुम हो गुणी महान।दिया मित्र यमराज ने, मुझे मुफ्त का ज्ञान।। ऐसा क्यों अब हो
Read Moreसूरज आतिश बन गया,तपे नगर सब गाँव ।जीवों में अकुलाहटें,ढूंढ रहे सब छाँव ।।(१) लू चलती है गति लिए,बिलख रहा
Read Moreआया कैसा नया जमाना, देख-देखकर दंग। कैसा हुआ आज का प्राणी, पल-पल बदले रंग।। आम आदमी सोच रहा है, कैसे
Read Moreहो ममता की नींव पर, घर का पक्का रंग।मगर दरारें जब पड़ें, बिखरे रिश्तों संग।। रिश्तों की दीवार पर, लगे
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