डॉ. सत्यवान सौरभ के चर्चित दोहे
आज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश।बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश॥ छुपकर बैठे भेड़िये, लगा रहे हैं दाँव।बच पाए कैसे
Read Moreआज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश।बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश॥ छुपकर बैठे भेड़िये, लगा रहे हैं दाँव।बच पाए कैसे
Read Moreपैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से वीर,माटी अब भी पूछती, कब जागेगी पीर? स्वप्न सिसकते रह गए, कहाँ गई
Read Moreभगत सिंह, सुखदेव क्यों, खो बैठे पहचान।पूछ रही माँ भारती, तुम से हिंदुस्तान।। भगत सिंह, आज़ाद ने, फूंका था शंख
Read Moreनूतन सूर्य उजास में, मत छोड़ो तुम आस। सतगुरु चरनन सौंप सब, करो नवीन प्रयास।। इसका उसका कुछ नहीं, सब
Read Moreफागुन बैठा देखता, खाली है चौपाल।उतरे-उतरे रंग है, फीके सभी गुलाल॥ सजनी तेरे सँग रचूँ, ऐसा एक धमाल।तुझमे ख़ुद को
Read Moreहोली के त्यौहार में, ऐसी उठे तरंग।तन-मन में जो प्यार की, भर दे ख़ूब उमंग॥ आँगन-आँगन रंग हो, हो रंगीला
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