जिजीविषा नित देखिये
गिरती मकड़ी डोर से, जब तक उलझे तार।जिजीविषा नित देखिये, माने कभी न हार।।तिनका चुन चुन चोंच में, मूक हृदय
Read Moreगिरती मकड़ी डोर से, जब तक उलझे तार।जिजीविषा नित देखिये, माने कभी न हार।।तिनका चुन चुन चोंच में, मूक हृदय
Read Moreसूरज आतिश बन गया, तपे नगर सब गाँव ।जीवों में अकुलाहटें, ढूंढ रहे सब छाँव ।।(१) लू चलती है गति
Read Moreमन में भरकर प्रीत तुम,कैसे रखते धीर ?सुन ओ मेरे रांझिया,व्याकुल तेरी हीर ।। श्वास श्वास में तुम बसे,तुम ही
Read Moreकभी आप मत कीजिए, जानबूझकर पाप।नाहक लेने से भला, दूर रहे संताप।समझदार हो खुद बड़े, फिर भी देता सीख-अच्छा होगा
Read Moreरूप चाँदनी भा रही, रही आज मन मोह।अंतर्मन में नेह है,हर पल है आरोह।। सन्नाटा छाया हुआ,चुप है हर आवाज़।सुर
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