मुक्तक – ऐसा दो वरदान
प्रतिभा कौशल से बढ़े, गौरव गरिमा शान। काम देश के आ सकूं, ऊँची भरूँ उड़ान। मानवता पुष्पित रहें, करुणा नेह
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Read Moreविद्यार्थी श्रम अथक, करता रहें प्रयास। यत्न करें वह सकल, हो मन में विश्वास।। कोशिश जब हो सतत, सदा सार्थ
Read Moreजानते हैं बिल्ली को कुत्ते से लड़ाना,शांति के पुजारी को आतंकी बताना।धर्म और संस्कृति की बातें भुलाकर,सत्ता की खातिर, रिश्तों
Read Moreचैत्र शुक्ल प्रतिपदा को, छाया नूतन हर्ष।नई चेतना दे रहा, नव संवत्सर वर्ष। नृपति विक्रमादित्य से, ‘विक्रम संवत’ नाम।उज्जयिनी में
Read Moreकला जन्म से थी हुईं, जीवन की मुस्कान।कनक प्रभा हो पथ चली, शासन माता जान।। सूरजमल जिनके पिता, छोटी बाई
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