धीरे धीरे
इतिहास की परतें खुलेंगी धीरे धीरे,सत्य से धूल चादर हटेगी धीरे धीरे।ली अभी अंगड़ाई हिन्दू ने थोड़ी थोड़ी,नींद से भी
Read Moreदोषारोपण कर रहे, अब अपने ही लोग।तेजी से है बढ़ रहा, कोरोना जस रोग।दोषी भी हम आप हैं, देख रहे
Read Moreमुस्कानों की ओट में, छुपा हुआ अवसाद।हर रिश्ता अब बन गया, मतलब का संवाद॥ अपने ही जब दे गए, दिल
Read Moreजन्मदिवस हनुमान का, हर्षित सीता राम |बिगडे़ काम संवारता, है हनुमत का नाम |भक्त अनोखा हो गया, सिया राम का
Read Moreठोकर खाकर भी उठा, हार न थी मंजूरतेज भाग कर मिल गयी, मंजिल जो थी दूर एक पैर जब कट
Read Moreप्यासे को पानी मिला अधरों की मुस्कान।बस इतनी सी चाहत लिए फिरें इंसान।।गांवों में अब है कहां, हरियाली की आस।सांसों
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