मुक्तक
मूँद नयन हम स्वप्न देखते चित्र वो ऐसा हो।खुशबू से महका दे आँगन इत्र वो ऐसा हो।जिससे खुलकर बात करूंँ
Read Moreमन के सच्चे मित्र जो, छाया बनकर साथ।धूप पड़े संसार की, थामे जीवन-हाथ॥ दौलत, शोहरत, नाम सब, पल में जाएँ
Read Moreनन्हे हाथों की खुशी, नभ जितने अरमान।गेंद संग ही खेलता, अपना सारा जहान॥ छत हो, गाड़ी या गली, हर जगह
Read Moreमुख पर कितने रंग हैं, भीतर सूना गाँव।सच की पगडंडी मिली, छोड़ गए सब ठाँव॥ सेवा यदि हो नाम की,
Read Moreप्रेम न बोले शोर से, बोले मन की बात।मौन अधर मुस्काइए, जग जाएँ जज़्बात॥ प्रेम नदी की धार है, निर्मल
Read Moreघर-आँगन में गूँजती, बच्चों की किलकार।हँसी-खुशी के संग सजे, जीवन का संसार॥ गेंद, खिलौने, साइकिलें, सपनों की उड़ान।छोटे-छोटे खेल में,
Read Moreरेंग रहे जिस ढंग से, बिल से निकले साँप।जागा सारा देश तब, लिया समय पर भाँप॥ छल-प्रपंच की ओट में,
Read Moreसत्य सदा निर्भीक है, झेले लाख प्रहार।झूठ महल-सा ढह पड़े, आते ही उजियार॥ कर्म बिना मिलता नहीं, जीवन में सम्मान।मेहनत
Read Moreउत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार।गढें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार।। वाणी में गुरुदेव की, होता प्रभु का
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