बालगीत – रहते घर में जीव हमारे
रहते सँग – सँग जीव हमारे। घर में निशि – दिन लगते प्यारे।। मच्छर मक्खी नित के साथी। रहते नहीं
Read Moreरहते सँग – सँग जीव हमारे। घर में निशि – दिन लगते प्यारे।। मच्छर मक्खी नित के साथी। रहते नहीं
Read Moreखुशियों वाले नव रंगों से ,बाग़ सजाने आई तितली। उपवन के नव फूलों पे ,प्रीत लुटाने आई तितली। देख बहारें
Read Moreबालकविता “खेतों में शहतूत उगाओ”(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)—कितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।।—हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।—शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत
Read Moreसबसे प्यारी दोस्त किताबें। देती ज्ञान को धार किताबें। हर बच्चे के लिए जरूरी, दुनिया पूरी भरी किताबें।। पढ़ किताबें
Read Moreचंदा मामा रूप तुम्हारा मुझे लुभाया करता है | घटना- बढना निश दिन तेरा मुझ में अचरज भरता है |
Read Moreबालकविता “खीरे को भी करना याद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)—तन-मन की जो हरता पीरावो ही कहलाता है खीरा—चाहे इसका रस पी
Read Moreराजन के पापा ने दी साइकिल, स्कूल है जाता उसपर सवार। मस्ती करते वह नहीं है थकता, मिलता इससे खुशियां
Read Moreबालगीत “मन को बहुत लुभाते आम”—एक साल में आते आम।सबके मन को भाते आम।।—जब वर्षा से आँगन भरता,स्वाद बदलने को
Read Moreआओ वृक्ष -मित्र बन जाएँ। छाया देकर ताप मिटाएँ।। वृक्ष सदा हैं पर – उपकारी। हवा बहाते शीतल न्यारी।। वृक्षों
Read Moreआओ-आओ प्यारे बच्चो चलो घूमने-फिरने जाएंगे छुटियाँ अब तो शुरु हुई चलों आनंद खूब मनायेंगे। छुट्टी के संग-संग गर्मी आई
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