बाल कविता – कोयल कुहू- कुहू कर बोली
कोयल कुहू- कुहू कर बोली।उठो बालको आई होली।। फूल खिले हैं क्यारी -क्यारी।रंग-बिरंगी है तैयारी।। गेंदा और गुलाब महकते।जिन पर
Read Moreकोयल कुहू- कुहू कर बोली।उठो बालको आई होली।। फूल खिले हैं क्यारी -क्यारी।रंग-बिरंगी है तैयारी।। गेंदा और गुलाब महकते।जिन पर
Read Moreपापा की गोदी गर्म-गर्म,जैसे धूप सुहानी।बैठा हूँ मैं चिपक के उनसे,दुनिया लगे कहानी। छोटी बोतल हाथ में मेरी,घूंट-घूंट मुझे पिलाते।पापा
Read Moreछुट्टी की घंटी बजी,खेलने चले सभी।दोस्ती की गली में,मस्ती के रंग छिपे। गोल-गोल गेंद फेंकें,हँसी से आँगन महके।छुपन-छुपाई खेलें,हर दिल
Read Moreनन्हा बच्चा जाग गया,रजाई में मुस्काया।धीरे-धीरे आँखें खोली,मम्मी को बुलाया। नरम-नरम सी रजाई है,उसमें छिपकर खेले।कभी इधर तो कभी उधर,हँसते-हँसते
Read Moreनन्हे-नन्हे दो साथी,निकले लेकर अपनी गाड़ी।एक चला नीली मोटर पर,दूजी लाल सवारी। धीरे-धीरे चलो भैया,हँसकर बोली प्यारी बहना।रास्ता अपना खेल
Read Moreनन्हे बच्चे मैदान आए,खेलने का मन बनाए।हाथ में बैट, गेंद भी लाल,खेल लगे सबको कमाल। अंकल पास खड़े मुस्काएँ,“शाबाश!” कहकर
Read Moreलाल गाड़ी चली सड़क पर,दो दोस्त बैठे हैं उस पर।आगे वाला गाड़ी चलाए,पीछे वाला गीत सुनाए। हँसना-खेलना, बातें करना,साथ सफ़र
Read Moreरोटी गरम बाजरे वाली।सरसों की भुजिया से खा ली।। जाड़े के ये अनुपम भोजन।करते नया स्वाद संयोजन।।हरी मटर की बजती
Read Moreनन्हे हाथ में नीला बल्ला,आँखों में सपनों का हल्ला।सड़क बनी है आज मैदान,खेल रहा है छोटा शैतान।। बैटमैन वाली प्यारी
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