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जय विजय

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गीतिका/ग़ज़ल
*प्रीती श्रीवास्तव 14/05/202614/05/2026

ग़ज़ल

रहते हैं मुहब्बत से तमाशा नहीं करते।खुश रहते हैं हर हाल में दिखावा नहीं करते।। तक़दीर बदल लेते हैं कर्मों

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गीतिका/ग़ज़ल
डॉ. पूनम माटिया 13/05/202613/05/2026

ग़ज़ल

वक़्त चलता ही रहा चाल, हमारा क्या हैकिसने पूछा है कभी हाल हमारा क्या है कैसे गुज़री है इधर और

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गीतिका/ग़ज़ल
प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत' 13/05/202613/05/2026

सफ़र

मन खोजता है बसर कहाँरास आये हमको घर कहाँ पा ली ज़माने की ख़ुशीउनके बिना है गुज़र कहाँ नेकी सभी

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हास्य व्यंग्य
*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम' 13/05/202613/05/2026

व्यंग्य – सभ्यता खड़ी हो गई है!

हमारी मनुष्य जाति की प्रायः तीन अवस्थाएँ प्रचलन में हैं :1.बैठना 2.लेटना और 3.खड़े रहना। एक और चौथी अवस्था भी

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गीत/नवगीत
*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम' 13/05/202613/05/2026

मुँह बाए प्यासी है धरती

मुँह बाए प्यासी है धरतीकरे मेघ की आस। तपता सूरज जेठ मास मेंसूख रहे द्रुम-बेलत्राहि-त्राहि मच रही धरा परजीव रहे

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बाल कविता
*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम' 13/05/202613/05/2026

अम्मा रोटी गोल बनाती

अम्मा रोटी गोल बनाती ।दाल – भात के संग खिलाती।। गोबर के उपले जलते हैं।साँझ हुई सूरज ढलते हैं।।चूल्हे में

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गीतिका/ग़ज़ल
*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम' 13/05/202613/05/2026

गीतिका- माँ

श्रम से नहीं उबरती माँ।हर पल उद्यम करती माँ।। निज संतति की ईश्वर जो,नहीं किसी से डरती माँ। पुत्री-पुत्र प्रसविनी

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सामाजिक
दिलीप पाण्डेय 13/05/2026

एक ही ठुंकाई में याद आया हम भी राजपूत थे

यूपी के एक शहर में राजपूतों ने जिहादी पत्थरबाजों की जमकर धुनाई उसी छत पर जाकर की जहां से जिहादी

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म
संकलित 13/05/202613/05/2026

वेद 3000 साल पुराने हैं… या 1,96,08,53,127 साल?

वेद मनुष्य के रचे नहीं, परमेश्वर के ज्ञान हैं। आर्यसमाज की मान्य गणना के अनुसार विक्रम संवत् 2083 में सृष्टि

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गीत/नवगीत
*डॉ. सत्यवान सौरभ 13/05/202613/05/2026

गीत

जब तक था रस बाँटता, होते रहे निहाल।खुदगर्जी थोड़ा हुआ, मचने लगा बवाल।। जब तक थाली भर मिली, करते रहे

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सम्पादक : डाॅ विजय कुमार सिंघल

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