ग़ज़ल
रहते हैं मुहब्बत से तमाशा नहीं करते।खुश रहते हैं हर हाल में दिखावा नहीं करते।। तक़दीर बदल लेते हैं कर्मों
Read Moreहमारी मनुष्य जाति की प्रायः तीन अवस्थाएँ प्रचलन में हैं :1.बैठना 2.लेटना और 3.खड़े रहना। एक और चौथी अवस्था भी
Read Moreमुँह बाए प्यासी है धरतीकरे मेघ की आस। तपता सूरज जेठ मास मेंसूख रहे द्रुम-बेलत्राहि-त्राहि मच रही धरा परजीव रहे
Read Moreअम्मा रोटी गोल बनाती ।दाल – भात के संग खिलाती।। गोबर के उपले जलते हैं।साँझ हुई सूरज ढलते हैं।।चूल्हे में
Read Moreश्रम से नहीं उबरती माँ।हर पल उद्यम करती माँ।। निज संतति की ईश्वर जो,नहीं किसी से डरती माँ। पुत्री-पुत्र प्रसविनी
Read Moreयूपी के एक शहर में राजपूतों ने जिहादी पत्थरबाजों की जमकर धुनाई उसी छत पर जाकर की जहां से जिहादी
Read Moreवेद मनुष्य के रचे नहीं, परमेश्वर के ज्ञान हैं। आर्यसमाज की मान्य गणना के अनुसार विक्रम संवत् 2083 में सृष्टि
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