रोला छंद
डूब रही है नाव, नहीं दिख रहा किनारा।कोई नहीं सहाय, बना किस्मत का मारा।।समय समय की बात, व्यर्थ अब जीवन
Read More.. और अपने हिस्से की सारी तकनीकी पढ़ाई समाप्त कर लेने के बाद भी जब कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं मिला तब
Read Moreकुछ त्रासदियाँ सिर्फ जानें नहीं लेतीं, वे इंसानियत की चेतना को भी झकझोर देती हैं। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित
Read Moreमानव इतिहास में शायद पहली बार ऐसा समय आया है जब सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ ही उसके अस्तित्व के
Read Moreजीवन में धन, संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा का अपना महत्व है, लेकिन कुछ ऐसी अमूल्य संपत्तियां भी होती हैं जिन्हें
Read Moreपिछले कुछ दिनों से आशा फोन पर बहुत कम ही बात करती थी। कारण स्पष्ट था, ए आई के आने
Read Moreचिंतन से चित्त हो अशांतमन रहने लगे क्लांतएकाकीपन रास आने लगेरातें लंबी हो डराने लगेहर आहट पर मन घबराने लगेकुंठा
Read More(1)मुरलीधर रिक्शा से उतरे। मालती को भी उतरने का संकेत किया।“यह फलों की टोकरी कहाँ रख दूँ बाबू जी!” रिक्शावाले
Read Moreसीवान जिले के चैनपुर निवासी युवा साहित्यकार, शिक्षक एवं समाजसेवी रूपेश कुमार को शिक्षा, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके
Read Moreपर्यावरण शब्द परि तथा आवरण से मिलकर बना है। परि का अर्थ हैं चारों ओर तथा आवरण का अर्थ है
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