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  • “कृष्णावतार”

    “कृष्णावतार”

    “कृष्णावतार” (रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।)   हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रही थी, बीजलियाँ हाथ हाथ को, भी ना...

  • सावन विरह-गीत

    सावन विरह-गीत

    सावन विरह-गीत सावन मनभावन तन हरषावन आया। घायल कर पागल करता बादल छाया।। क्यों मोर पपीहा मन में आग लगाये। सोयी अभिलाषा तन की क्यों ये जगाये। पी को करके याद सखी जी घबराया। सावन —–...

  • होली के रंग

    होली के रंग

    “होली के रंग” होली की मची है धूम, रहे होलियार झूम, मस्त है मलंग जैसे, डफली बजात है। हाथ उठा आँख मींच, जोगीड़ा की तान खींच, मुख से अजीब कोई, स्वाँग को बनात है। रंगों में...

  • भारत यश गाथा

    भारत यश गाथा

    “भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति सुंदर, है वैभव इसका जैसा पुरंदर, स्थिति...

  • ग़ज़ल (26 जनवरी)

    ग़ज़ल (26 जनवरी)

    ग़ज़ल (जनवरी के मास की) 2122 2122 2122 212 जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है, आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है। ईशवीं उन्नीस सौ पंचास की थी शुभ घड़ी, तब से गूँजी...


  • हमारी हिन्दी

    हमारी हिन्दी

    भाषा बड़ी है प्यारी जग में हमारी हिन्दी, चन्दा के जैसे सोहे नभ में हमारी हिन्दी। पहचान हमको देती सबसे अलग ये न्यारी, मीठी जगत में सबसे रस में हमारी हिन्दी। हर श्वास में ये बसके...