हाइकु/सेदोका

हाइकु (नव-दुर्गा)

हाइकु (नव-दुर्गा)P शैलपुत्री माँ हिम गिरि तनया वांछित-लाभा। ** ब्रह्मचारिणी कटु तप चारिणी वैराग्य दात्री। ** माँ चन्द्रघण्टा शशि सम शीतला शांति प्रदाता। ** चौथी कूष्माण्डा माँ ब्रह्मांड सृजेता उन्नति दाता। ** श्री स्कंदमाता कार्तिकेय की माता वृत्ति निरोधा। ** माँ कात्यायनी कात्यायन तनया पुरुषार्थ दा। ** कालरात्रि माँ तम-निशा स्वरूपा भय विमुक्ता। ** माँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – लगाए बहुत साल याँ आते आते

लगाए बहुत साल याँ आते आते, रुला ही दिया क़द्र-दाँ आते आते। बहुत थक गए हम रह-ए-ज़िन्दगी में, थकीं पर न दुश्वारियाँ आते आते। घुटी साँस ज्यूँ ही गली आई उनकी, न मर जाएँ उनका मकाँ आते आते। करें याद गर वो ज़रा भी नहीं ग़म, निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते। बड़ी गर्मजोशी से […]

कविता

सोभावती छंद (हिन्दी भाषा)

देवों की भाषा से जन्मी हिन्दी। हिन्दुस्तां के माथे की है बिन्दी।। दोहों, छंदों, चैपाई की माता। मीरा, सूरा के गीतों की दाता।। हिंदुस्तानी साँसों में है छाई। पाटे सारे भेदों की ये खाई।। अंग्रेजी में सारे ऐसे पैठे। हिन्दी से नाता ही तोड़े बैठे।। भावों को भाषा देती लोनाई। भाषा से प्राणों की भी […]

कविता कुण्डली/छंद

अहीर छंद “प्रदूषण”

अहीर छंद “प्रदूषण” बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।। यह दावानल आग। हम सब पर यह दाग।। जाओ मानव जाग। छोड़ो भागमभाग।। मनुज दनुज सम होय। मर्यादा वह खोय।। स्वारथ का बन भृत्य। करे असुर सम कृत्य।। जंगल करत विनष्ट। सहे जीव-जग कष्ट।। प्राणी सकल कराह। भरते […]

कविता कुण्डली/छंद

32 मात्रिक छंद “जाग उठो हे वीर जवानों”

32 मात्रिक छंद “जाग उठो हे वीर जवानों” जाग उठो हे वीर जवानों, तुमने अब तक बहुत सहा है। त्यज दो आज नींद ये गहरी, देश तुम्हें ये बुला रहा है।। छोड़ो आलस का अब आँचल, अरि-ऐंठन का कर दो मर्दन। टूटो मृग झुंडों के ऊपर, गर्जन करते केहरि सम बन।।1।। संकट के घन उमड़ […]

गीत/नवगीत

मेघ जीवन

“मेघ जीवन” किरणों की मथनी से सूरज, मथता जब सागर जल को । नवनीत मेघ तब ऊपर आता, नवजीवन देने भूतल को । था कतरा कतरा सा पहले, धुनी तूल सा पूर्ण धवल । घनीभूत जुड़ जुड़ के हुआ तो, धरा काली घटा का रूप प्रबल । दमका तड़ित प्रचंड महा, चला चीर अम्बर के […]

हाइकु/सेदोका

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा)

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा) अस्थिपिंजर कफ़न में लिपटा एक ठूँठ सा। पूर्ण उपेक्ष्य मानवी जीवन का कटु घूँट सा। स्लेटी बदन उसपे भाग्य लिखे मैलों की धार। कटोरा लिए एक मूर्त ढो रही तन का भार। लाल लोचन अपलक ताकते राहगीर को। सूखे से होंठ पपड़ी में छिपाए हर पीर को। उलझी लटें बरगद […]

भजन/भावगीत

आओ सब मिल कर संकल्प करें

“आओ सब मिल कर संकल्प करें ” आओ सब मिल कर संकल्प करें। चैत्र शुक्ल नवमी है आज, नूतन कुछ तो करें। आओ सब मिल कर संकल्प करें॥ मर्यादा में रहना सीखें, सागर से बन कर हम सब। मर्यादा में रहना सिखलाएं, तोड़े कोई इसको जब। मर्यादा के स्वामी की, धारण तो यह सीख करें। आओ […]

गीतिका/ग़ज़ल

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

काफ़िया=आ रदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर* खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर सजा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना वफ़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर नशा ये […]

कविता पद्य साहित्य

“कृष्णावतार”

“कृष्णावतार” (रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।)   हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रही थी, बीजलियाँ हाथ हाथ को, भी ना सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।। यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी। विपदाओं की, एक […]