कविता पद्य साहित्य

मनविश्राम छंद “माखन लीला”

माखन श्याम चुरा नित ही, कछु खावत कछु लिपटावै। ग्वाल सखा सह धूम करे, यमुना तट गउन चरावै।। फोड़त माखन की मटकी, सब गोरस नित बिखराये। गोपिन भी लख हर्षित हैं, पर रोष बयन दिखलाये।। मात यशोमत नित्य मथे, दधि की जब लबलब झारी। मोहन आय तभी धमकै, अरु बाँह भरत महतारी।। मात बिलोवत जाय […]

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मधुमती छंद “मधुवन महके”

मधुवन महके। शुक पिक चहके।। जन-मन सरसे। मधु रस बरसे।। ब्रज-रज उजली। कलि कलि मचली।। गलि गलि सुर है। गिरधर उर है।। नयन सजल हैं। वयन विकल हैं।। हृदय उमड़ता। मति मँह जड़ता।। अति अघकर मैं। तव पग पर मैं।। प्रभु पसरत हूँ। ‘नमन’ करत हूँ। =========== मधुमती छंद विधान – “ननग” गणन की। मधुर […]

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धार छंद “आज की दशा”

धार छंद “आज की दशा” अत्याचार। भ्रष्टाचार। का है जोर। चारों ओर।। सारे लोग। झेलें रोग। हों लाचार। खाएँ मार।। नेता नीच। आँखें मीच। फैला कीच। राहों बीच।। पूँजी जोड़। माथा मोड़। भागे छोड़। नाता तोड़।। आशा नाँहि। लोगों माँहि। खोटे जोग। का है योग।। सारे आज। खोये लाज। ना है रोध। कोई बोध।। ======== […]

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पादाकुलक छंद “राम महिमा”

पादाकुलक छंद “राम महिमा” सीता राम हृदय से बोलें। सरस सुधा जीवन में घोलें।। राम रसायन धारण कर लें। भवसागर के संकट हर लें।। आज समाज विपद में भारी। सुध लें आकर भव भय हारी।। राम दयामय धनु को धारें। भव के सारे दुख को टारें।। चंचल मन माया का भूखा। भजन बिना यह मरु […]

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चौपई छंद “चूहा बिल्ली”

(बाल कविता) म्याऊँ म्याऊँ के दे बोल। आँखें करके गोल मटोल।। बिल्ली रानी है बेहाल। चूहे की बन काल कराल।। घुमा घुमा कर अपनी पूँछ। ऊपर नीचे करके मूँछ।। पंजे से दे दे कर थाप। मूषक लेना चाहे चाप।। पंजे से कर सिर की खाज। चूँ चूँ की दे कर आवाज।। मौत खड़ी है सिर […]

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मानव छंद “नारी की व्यथा”

मानव छंद “नारी की व्यथा” आडंबर में नित्य घिरा। नारी का सम्मान गिरा।। सत्ता के बुलडोजर से। उन्मादी के लश्कर से।। रही सदा निज में घुटती। युग युग से आयी लुटती।। सत्ता के हाथों नारी। झूल रही बन बेचारी।। मौन भीष्म भी रखे जहाँ। अंधा है धृतराष्ट्र वहाँ।। उच्छृंखल हो राज-पुरुष। करते सारे पाप कलुष।। […]

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छप्पय छंद “शिव-महिमा”

छप्पय छंद “शिव-महिमा” करके तांडव नृत्य, प्रलय जग में शिव करते। विपदाएँ भव-ताप, भक्त जन का भी हरते। देवों के भी देव, सदा रीझें थोड़े में। करें हृदय नित वास, शैलजा सह जोड़े में। प्रभु का निवास कैलाश में, औघड़ दानी आप हैं। भज ले मनुष्य जो आप को, कटते भव के पाप हैं।। ********* […]

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उल्लाला छंद “किसान”

उल्लाला छंद “किसान” हल किसान का नहिं रुके, मौसम का जो रूप हो। आँधी हो तूफान हो, चाहे पड़ती धूप हो।। भाग्य कृषक का है टिका, कर्जा मौसम पर सदा। जीवन भर ही वो रहे, भार तले इनके लदा।। बहा स्वेद को रात दिन, घोर परिश्रम वो करे। फाके में खुद रह सदा, पेट कृषक […]

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चंद्रमणि छंद “गिल्ली डंडा”

चंद्रमणि छंद “गिल्ली डंडा” गिल्ली डंडा खेलते। ग्राम्य बाल सब झूमते।। क्रीड़ा में तल्लीन हैं। मस्ती के आधीन हैं।। फर्क नहीं है जात का। रंग न देखे गात का।। ऊँच नीच की त्याग घिन। संग खेलते भेद बिन।। खेतों की ये धूल पर। आस पास को भूल कर।। खेल रहे हँस हँस सभी। झगड़ा भी […]

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एकावली छंद “मनमीत”

एकावली छंद “मनमीत” किसी से, दिल लगा। रह गया, मैं ठगा।। हृदय में, खिल गयी। कोंपली, इक नयी।। मिला जब, मनमीत। जगी है, यह प्रीत।। आ गया, बदलाव। उत्तंग, है चाव।। मोम से, पिघलते। भाव सब, मचलते।। कुलांचे, भर रहे। अनकही, सब कहे।। रात भी, चुलबुली। पलक हैं, अधखुली।। प्रणय-तरु, हों हरे। बाँह में, नभ […]