Category : कथा साहित्य

  • झरती हुई संवेदना

    झरती हुई संवेदना

    सुबह-सुबह लैपटॉप खोलते ही स्क्रीन पर आए चित्र को देखकर संवेदना हैरान हो गई. एक तरफ पतझड़ के बिना पत्तों वाले पेड़ तो दूसरी ओर पीले फूलों से लदा हुआ गुलमोहर जैसे फूलों वाला ऑस्ट्रेलियाई जूनियल,...


  • बुद्धू कौन

    बुद्धू कौन

    ” बेटा , कथरीसाज आया है । पुरानी साड़ियाँ जो निकाली थीं लेकर आना जरा।” मेरी माँ बुला रहीं थी । ना ना ना , मुझे नही मेरी श्रीमति जी को। जी हाँ , वो उसे...

  • वेदना

    वेदना

    ”वेद पढ़ना आसान हो सकता है लेकिन जिस दिन आपने किसी की “वेदना” को पढ़ लिया तो समझो ईश्वर को पा लिया.” आज सुबह-सुबह साध्या ने सुप्रभात करते हुए यह संदेश भी भेजा था. साध्या ने...

  • तृष्णा

    तृष्णा

    आज शाम को सैर करते हुए पार्क में गई तो पार्वती के अलावा बाकी सब आए हुए थे. मुझे अंदाजा हो गया था, कि पार्वती किस काम में व्यस्त है. पार्वती साथ वाली कॉलोनी के श्रमिकों...

  • तलाश

    तलाश

    अमेरिका की एक अच्छी यूनिवर्सिटी से एम एस की डिग्री लेकर कृतिका ने वहीं पर दो साल किसी कंपनी में नौकरी की। पर न जाने क्यों उसका दिल नहीं लगा। उसे वहां पर एक खालीपन, एक...

  • यादों के झरोखे से-4

    यादों के झरोखे से-4

    वे दो रूमाल उन दो रूमालों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा, कि कोई उनको इतना सहेजकर रखेगा और 15 साल बाद कोई उन पर ब्लॉग लिखेगा. भाई, यह तो अपनी-अपनी किस्मत है. 15 साल...

  • लघु कहानी –  कब तक ?

    लघु कहानी – कब तक ?

    बचपन से ही उसे डांस का बहुत शौक था । अक्सर छुप छुप कर टीवी के सामने माधुरी के गाने पर थिरका करती थी । जब वह नाचती थी तो उसके चेहरे की खुशी देखने लायक...

  • मुस्कान

    मुस्कान

    आज सुबह-सुबह एक अनमोल वचन सामने आ गया. ”जो मुस्कुरा रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा, जो चल रहा है, उसके पाँव में छाला होगा, बिना संघर्ष के इन्सान चमक नहीं सकता, जो जलेगा उसी...

  • आक्रोश

    आक्रोश

    “सर, आज न तो स्वतंत्रता दिवस है, न ही गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती भी तो नहीं, फिर इधर ये देशभक्ति और शहीदों वाले गीत क्यों बजाए जा रहे हैं।” अनपढ़ से दिखने वाले लाइनमैन ने मुझसे...