Category : कथा साहित्य


  • अतीत की अनुगूंज -1

    अतीत की अनुगूंज -1

    भारत छोड़ने के बाद मैंने अध्यापन में पुनः अपना भाग्य बनाया। पहले दस वर्ष लंदन के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में गणित पढ़ाया परन्तु फिर गणित पढ़ाने से मन भर गया। मैं हरेक विषय पढ़ना चाहती थी।...

  • प्राइस टेग

    प्राइस टेग

    कला से जीवन भर का रिश्ता जोड़ने के उद्देश्य से कैलाश सपरिवार साक्षात्कार के लिए आया था। तिलक दहेज की वही रुकावटें एवं नकारात्मक विचार। अगले दिन कैलाश को वाट्सएप पर कला का मैसेज मिला  —-...

  • दाग़

    दाग़

    ‘देख न कमली ..मेरे सलवार पर कुछ दाग लग गया है’, पहली बार माहवारी आने पर बालिका विद्यालय में पढ़ रही छात्रा कुसुम डरी और सहमी अपनी सहेली से बोली … ‘मैं जल्दी से अपने घर...

  • सच्चे आभूषण

    सच्चे आभूषण

    एक बालक प्रतिदिन अपने विद्यालय पढ़ने जाता था | उसके घर में अपने बेेटे पर प्राण न्योछावर करनेवाली एक प्यारी और सरल हृदयवाली एक माँ थी , जो अपने प्यारे बेटे की हर मांग पूरी करने में बहुत...

  • अंतर्मन की पुकार

    अंतर्मन की पुकार

    दोनों भक्त मंदिर प्रांगण में खड़े थे. पहला कुछ देर तक मंदिर की भव्यता और मूर्ति की सौम्यता को निहारने के बाद बोला, “इसके निर्माण में मैंने रात-दिन एक कर दिये. पिछले दिनों यह नगाड़ा सेट...

  • मिठाई

    मिठाई

    मिठाई जयपुर के जनाना अस्पताल में एक अम्मा जी पूरे अस्पताल को सर पर उठाए सभी को खुशी से रो रो कर लड्डू खिला रही है । साथ साथ भगवान को दुआएं देती जा रही है...

  • जुनून

    जुनून

    अभी-अभी कला-दीर्घा में परिणाम की घोषणा करने के बाद शिल्पा घर वापिस आई है. रह-रहकर उसे एक चित्र के सामने लगी भीड़ की याद आ रही थी. ”चित्रकार ने गज़ब का चित्र बनाया है.” एक दर्शक...

  • चुनावी रैली

    चुनावी रैली

    लाला धनीराम कलुआ को अंतिम चेतावनी देते हुए बोला ,” देख कलुआ ! तुझे मैं एक मौका और दे सकता हूँ । बता कब तक दे सकता है मेरे दस हजार रुपये ? “ लाला को...

  • लघुकथा – पलायन

    लघुकथा – पलायन

    महानगर में बसा मुकेश अपनी रोजमर्रा के जीवन में इतना व्यस्त रहता कि उसे साँस लेने की फुरसत ही नहीं मिलती,कारखाने से घर, घर से कारखाने तक जैसे जिन्दगी यहीं तक सिमट कर रह गई थी।...