Category : मुक्तक/दोहा

  • नारी

    नारी

    जिस देश की इज्जत की निगहवान है नारी, उस देश की हर आन बान शान है नारी । ये नारी ना होती तो फिर लोग कहाँ होते, सतरूपा के बगैर मनु जीवनभर रोते।।

  • अनेकता में एकता

    अनेकता में एकता

    आप लोग इस समूह को आगे बढायें, अनेकता में एकता जहां को दिखायें। हैं आप लोग इस देश का भविष्य, आने वाले भविष्य को सुन्दर बनायें। ———————— फुल की तरह हमेशा चहकते रहें। पंखुड़ियों की तरह...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    नई भोर की सतरंगी छवि नई कविता लिखता है कवि गढ़ते है शब्द उकेरे चित्र निकलता जब बादलो से रवि आँखों में सपने लिए स्वागत नये वर्ष का नई किरण के साथ रवि आया नये वर्ष...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तेरे धैर्य के आगे नत हूँ माँ दुःख तो तूने सहे मैं पस्त हूँ माँ तेरी बराबरी नही कर सकती तू सागर मैं नदी का तट हूँ माँ शान्ति पुरोहित

  • मुक्तक

    मुक्तक

    धोये चरण राम के अश्रु जल बरसाया धो अपने पाप को केवट मन हर्षाया लिया चरणामृत मुक्त हुआ पापों से इस जल को देख गंगा जल भी हर्षाया   शान्ति पुरोहित

  • मुक्तक

    मुक्तक

    ऋतु शिशिर आयी, सर्द समीर ने दी दस्तक नभ घटा छाई घनघोर, मावट की दस्तक अवनि छुपी है, आज कोहरे की ओट मौसम की मार सूरज ने नही दी दस्तक — शान्ति पुरोहित