दोहा
माटी जोड़ कुम्हार जो, तू सही रोंदे मोहिकिसी दिन होगा मानना, अक्स जानूँगी तोहि जीवन हैं तो लायेंगे, घड़ा, सुराही,
Read Moreनेता कुर्सी पर लदा,सुख का करता भोग।नेता जन के तंत्र का,बहुत बड़ा है रोग।। नेता से वादे झरें,बाहर आता झूठ।खड़ा
Read Moreवन जब तक,तब तक यहाँ,हवा मिलेगी ख़ूब। वरना हम सब पीर में,जाएँगे नित डूब।। वन का रहना है हमें,सुख का
Read Moreधूप में जलते हैं खुद और पाँव में छाले पड़े,चलते रहें रात दिन, जितना भी चलना पड़े।चिन्ता यही रहती है
Read More