Category : हाइकु/सेदोका

  • फ़ौजी-किसान  

    फ़ौजी-किसान  

    1. कर्म पे डटा कभी नहीं थकता फ़ौजी-किसान! 2. किसान हारे ख़ुदकुशी करते, बेबस सारे! 3. सत्ता बेशर्म राजनीति करती, मरे किसान! 4. बिकता मोल पसीना अनमोल, भूखा किसान! 5. कोई न सुने किससे कहे हाल...

  • वर्षा

    वर्षा

    सावन आया वर्षा संग लाया है खुशियाँ छाईं देखो सावन सुहावना मौसम प्रकृति मस्त है उमड़े मेघ फिर वर्षा हो गई आया सावन बरसात में मेघ उमड़ें वर्षें प्रेम उमड़े माटी महकी है प्रकृति चहकी बरसात...

  • हाइकू : किसान

    हाइकू : किसान

    सारे हैं मौन मर रहा किसान दोषी हैं कौन मजे की बात हो रही सियासत देखो हालात चिंता वोट की खिसक रही कुर्सी ऐसी चोट की ना है आयोग जो सुने किसान की बढ़ा है रोग...

  • हाइकू

    हाइकू

    हाइकू 1 पैसा बोलता सर चढ़कर है घमण्डी होता । 2 पैसा जरुरी इन्कार तो नहीं है पर कितना 3 खुशियाँ वहीँ पहाड़ों पे मिलती पैसे वालो को 4 सुकून ख़ोजे क़ैद होकर जब हंसता पैसा...

  • बेटी

    बेटी

    बेटी निराली लगती बड़ी प्यारी है बड़ी न्यारी! ……………….. नन्ही कली ने जब आँगन आई बाजे बधाई! …………….. घर आँगन खिली उपवन से लगते प्यारे! ……………… फूलों सा सीचा सर्व गुण भरके नन्हीं परी को! ………………...

  • हाइकू

    हाइकू

    घर बाहर हो रहा घमासान रो रहे बच्चे I भूखे है पेट माँग रहे है भीख खाते ठोकर I सड़क जाम आ गया अभिनेता दबते लोग I देश में पैसा फिर भी मरे लोग कैसा इंसाफ...


  • शीर्षक- नींद

    शीर्षक- नींद

        नींद से जाग मंजिल पाने भाग छोड़ आलस्य नींद पूरी लो स्वस्थ जीवन जीने ये औषधि है © रचनाकार – नवीन कुमार जैन  

  • बेटी

    बेटी

    बटी निराली लगती बड़ी प्यारी है बड़ी न्यारी! ……………….. नन्ही कली ने जब आँगन आई बाजे बधाई! …………….. घर आँगन खिली उपवन से लगते प्यारे! ……………… फूलों सा सीचा सर्व गुण भरके नन्हीं परी को! ………………...

  • हाइकू !

    हाइकू !

    १. अंसतुलन प्रकृति का प्रकोप समझो अब ! २. ये प्रदूषण हरियाली सिमटे पेड़ बचाओ ! ३. क्यूं रुढ़िवाद करे खोखली जड़ें पीड़ित कहें ! ४. बदलो उन्हें बन बेड़ी जो यूंही उन्नति रोकें ! ५....