Category : भजन/भावगीत

  • मुझे अपना बना लो गोविंदा

    मुझे अपना बना लो गोविंदा

    मुझे अपना बना लो गोविंदा चरणों में बिठा लो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———– तुम मुरली मधुर बजाते हो सुनते हैं रास रचाते हो मुझे रास दिखादो गोविंदा- मुझे अपना बना लो गोविंदा———–   मीरा...


  • द्वार खुले प्रभु रखते

    द्वार खुले प्रभु रखते

    भक्तों को दर्शन देने को द्वार खुले प्रभु रखते  इसीलिए भोले कहलाते इतनी कृपा करते-तेरी जय हो भोले, तेरी जय हो भोले(2) 1.सबको देते महल-माड़ियां, खुद पर्वत पर रहते आनंद-ही-आनंद देते चाहे भक्त शिकायत करते- तेरी...


  • कांवड़िया कांवड़ लाए हैं

    कांवड़िया कांवड़ लाए हैं

    चलो शिवशंकर के द्वारे, कांवड़िया कांवड़ लाए हैं   कांवड़िया कांवड़ लाए हैं, कांवड़िया कांवड़ लाए हैं- 1.शिव की जटा में गंगा-धारा, कांवड़ में गंगाजल प्यारा दोनों का मेल कराएंगे कांवड़िया कांवड़ लाए हैं-चलो शिवशंकर——————- 2.श्रद्धा से...

  • शिवशंकर की महिमा

    शिवशंकर की महिमा

    मेरे शिवशंकर की महिमा अपरम्पार  जो शिव का स्मरण करते हैं, उनका बेड़ा पार-मेरे शिवशंकर की————– 1.जटाजूट में सोहे गंगा मस्तक पर है प्यारा चंदा सर्पों के आभूषण सोहें, सर्पों की है माल-मेरे शिवशंकर की————– 2.वामभाग...

  • हे शिव शंकर

    हे शिव शंकर

    हे ! शम्भू हे! शिव शंकर, हे! कैलाशी हे! महादेव। हे!श्रवण मास के शुभदेवता, है तुमको आज प्रणाम निवेदित। आओ हृदय में निवास करो, भारत का कुछ कल्याण करो। दूर हतासा अंधकार हो, सुंदर सुखमय जन...

  • फूलों-कलियों ने महफिल सजाई (भावगीत)

    फूलों-कलियों ने महफिल सजाई (भावगीत)

    फूलों-कलियों ने महफिल सजाई, जन्मदिन तेरा है  सारी सृष्टि आज महकाई, जन्मदिन तेरा है- अंबर में फैले उजियारे, सूरज चंदा नजर उतारें आज तारों ने महफिल सजाई, जन्मदिन तेरा है फूलों-कलियों ने महफिल सजाई जन्मदिन तेरा...

  • माँ सरस्वती सामूहिक वंदना

    माँ सरस्वती सामूहिक वंदना

    माँ सरस्वती सामूहिक वंदना ———————————– नमस्तुभ्यं माँ आदिशक्ति,नमस्तुभ्यं वागेश्वरी, नमस्तुभ्यं वैकुण्ठ वासिनी,नमस्तुभ्यं माहेश्वरी, जय वाचा जय ईश्वरी,जय महाश्वेता मात, नमन तुम्हे वागेश्वरी, देना हरपल साथ, मेरा नमन करो स्वीकार जय सरस्वती माता, मिटे दोष न बनूँ...

  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    हे माँ मुझे, रोशनी दे ज्ञान की दूर कर  अज्ञानता हाथ में वीणा पुस्तक मोर पंख सुशोभित मस्तक, तू ज्ञान है विधाता ओ ममतामयी, करूणामयी इतनी कृपा मुझ पर पर करना मैं सदा चारी बनूँ। सत्य...