वर्ण पिरामिड- गंगा
1.माँगंगेजय होभागीरथीपापनाशिनीहे भवतारिणीतेरा जल निर्मल।2.माँगंगापावनतेरा जलअमृत सममोक्षदायिनीभव से तार देजीवन संवार दे।3.माँगंगाकी धाराशीतल हैअमृत समनीर है इसकापावन पापनाशी। — लीला
Read More1.माँगंगेजय होभागीरथीपापनाशिनीहे भवतारिणीतेरा जल निर्मल।2.माँगंगापावनतेरा जलअमृत सममोक्षदायिनीभव से तार देजीवन संवार दे।3.माँगंगाकी धाराशीतल हैअमृत समनीर है इसकापावन पापनाशी। — लीला
Read Moreगाँव निवाई में हर अमावस की रात एक अनजाना-सा डर उतर आता था. कच्ची पगडंडियाँ, घास-फूस के घर और दूर
Read Moreक्या खूबसूरत विषय दिया है- ‘ वो भी क्या दिन थे- बिजली गुल और छत पर मेला’. सचमुच वो दिन
Read Moreमम्मी ला देना पिचकारी,रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,मैं भी होली खेलूंगा जम के,रंगों की कर लूंगा तैयारी। टोली बनाकर हम निकलेंगे,रंग लगाएंगे झूमेंगे,पिचकारी
Read Moreमन में मेरे कहने को है बहुत कुछ,कैसे कहूं? कुछ समझ न पाऊं,मन में रखूं तो मन रूठ जाता है,बाहर
Read Moreनौतपा की अग्नि ज्वाला, धरती को तपाने आई है,प्रखर हुईं सूरज की किरणें, अम्बर ने आग बरसाई है। नौतपा की
Read Moreपहले हर बात दिल पर लेती थी,छोटी-सी बात में क्रोधित-सी होती थी,लोगों के शब्दों के अर्थ ढूंढती थी,फिर भी संतुष्ट
Read Moreनारी गौरव-संस्कृति की अमर धरोहर,शक्ति-स्नेह, समर्पण-स्वाभिमान से भरपूर,संस्कृति की शान, उससे ही जग में सम्मान,ममता की गंगा नारी, अभिमान से
Read Moreसबको हो समान अधिकार,भेदभाव का न हो अँधियार,ऊँच-नीच का रहे न पर्दा,सद्भाव का हो उजियार। रोटी, शिक्षा, सम्मान मिले,हर आँगन
Read Moreनई नौकरी से संभावना बहुत खुश थी. पहले वाली नौकरी में उसके समक्ष दो विकल्प थे- “बॉस के दंभ के
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