कोई अख़बार हो जाऊं
हक़ की बातें न करूं मैं सच्चाई से दूर हो जाऊं,अपने ज़मीर से लड़लूं, कोई अख़बार हो जाऊं। मेरे दिल
Read Moreहक़ की बातें न करूं मैं सच्चाई से दूर हो जाऊं,अपने ज़मीर से लड़लूं, कोई अख़बार हो जाऊं। मेरे दिल
Read More‘तेरी मेरी यारी’… यह महज़ दो शब्दों का एक जुमला नहीं, बल्कि ज़िंदगी का वह सबसे ख़ूबसूरत एहसास है जिसमें
Read Moreसनातन संस्कृति में काल गणना केवल समय का बोध नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा के बीच के गहन
Read More“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात् जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। हमारी मातृभूमि केवल मिट्टी का एक टुकड़ा
Read Moreसाहित्य केवल शब्दों का जोड़ या कोरी कल्पनाओं का आख्यान नहीं है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अंतरात्मा की
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
Read Moreनाराज़ है जो तु तो मैं भी बेचैन बड़ा हूं,बेरुखी का सबब मुझको बता भी देना, जा रहे हो तर्क
Read Moreजी में आता है के अब तर्क मुहब्ब्त कर दूं,ख़त तेरे सारे ही, हवाओं के हवाले कर दूं, तकाज़ा ए
Read Moreजीवन के सफर में इंसान अनगिनत रिश्तों से रूबरू होता है,कुछ खून के रिश्ते होते हैं, तो कुछ समय के
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