समाज की बेजान रस्में
शहला की ज़िंदगी उस सूखी झील की मानिंद हो गई थी जिसके वीरान किनारों पर अब परिंदे भी चहकना भूल
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Read Moreआज एक लंबे अरसे के बाद मन के द्वार पर फिर उसी सुंदर क्षण ने दस्तक दी है। वह एक
Read Moreयह दास्तान उस दौर की है जब रियासतों के सूरज ढल रहे थे, लेकिन खानदानी रसूख की तपिश अब भी
Read Moreआई आँधी चुनाव की तो डर गए नेता।गहरी थी नींद घबरा के उठ गए नेता।।कब तलक और आराम गाहों में
Read Moreआज का युग दिखावे, तकनीक और स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की अंधी दौड़ का युग है। इस दौड़ में
Read Moreहिंदी साहित्य के दैदीप्यमान नक्षत्र और कृष्ण भक्ति शाखा के अग्रणी कवि महाकवि सूरदास जी का व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय
Read Moreशहर की सबसे व्यस्त चौराहे के सिग्नल पर बारह साल के राजू के हाथ में कोई खिलौना नहीं, बल्कि एक
Read Moreआज जब हम विश्व पृथ्वी दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल कैलेंडर की एक तारीख़ नहीं, बल्कि मानवता के
Read Moreशहर के शोर से दूर उस पुरानी हवेली की दीवारों पर जमी काई अब सिसकियाँ लेती थी। वह हवेली, जिसे
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