कर्मफल
“मंथर गति से बहती जीवनदायिनी नदियाँ इतनी आक्रामक क्यों हैं? जिनके तीर पर उद्विग्न मन भी शांत हो जाता था,
Read Moreवह एक अजीब कोर्ट रूम था. पांच लोगों के अलावा किसी और को अंदर आने की इजाज़त नहीं थी. वादी,
Read Moreसरकारी अस्पताल के बरामदे में करीब साठ – पैंसठ साल की एक बुढ़िया बड़ी ही बेचैनी से टहल रही थी,
Read Moreवैसे तो बेटियों को हर पल मायके की याद आती है, लेकिन सावन के आते ही सभी बेटियों-बहिनों को मायके
Read Moreसूरज के मोबाईल पर मैसेज आया कि देश के साहित्यकारों की रचनाओं का एक वृहद ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है |
Read Moreसम्मान समारोह में जब मंच से उसका नाम पुकारा गया, तो उसने तालियों की ओर नहीं, आख़िरी पंक्ति में बैठी
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