सूत्रपात
रोज की जद्दोजहद और कशमकश के बाद घर लौटी रजनी चाय की केतली और प्याला लिये बालकनी में बैठ गयी।
Read Moreछत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में मालती अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। पास में खड़ी
Read Moreपति -पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए चिंतित रहते थे । पता नहीं, पहले पहल आखिरी सांस कौन ले
Read Moreपिछले कई वर्षों के बाद बेटा-बहू घर बसंत पंचमी के समय घर पर थे। चार वर्ष का उनका बेटा वीर
Read Moreपंद्रह साल से रमेसर उनके घर में था। सेठ हरिप्रसाद उसे बेटे की तरह मानते थे — कम से कम
Read Moreक्लिनिक में एक युवा लड़की आई — चेहरा सुंदर, लेकिन बेचैनी साफ झलक रही थी। डॉक्टर ने चश्मा ठीक किया
Read Moreकमलाबाई का नाम पूरे मोहल्ले में बहुत मशहूर था ,कहने को तो वह एक काम वाली थी, चार-पांच घरों में
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