लघुकथा – दलाली चलती रहेगी
जिले में एक ईमानदार अफसर की नियुक्ति हो गयी। बिना घूस लिये काम करता। दलाली एक रूपये की नहीं। बड़ा
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Read Moreपुराना घर था… मिट्टी की वही सौंधी महक, आँगन में खड़ा नीम का पेड़, और बरसों से साथ निभाती दीवारें।
Read Moreछत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में मालती अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। पास में खड़ी
Read Moreपति -पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए चिंतित रहते थे । पता नहीं, पहले पहल आखिरी सांस कौन ले
Read Moreपिछले कई वर्षों के बाद बेटा-बहू घर बसंत पंचमी के समय घर पर थे। चार वर्ष का उनका बेटा वीर
Read Moreपंद्रह साल से रमेसर उनके घर में था। सेठ हरिप्रसाद उसे बेटे की तरह मानते थे — कम से कम
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