लघुकथा – दाल – फुलका
आदत के अनुसार शाम के वक्त मैं रोज पार्क में घूमने निकल जाता हूं । वहां कई लोग मिल जाते
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Read Moreकस्बे के मेले में आये मध्यमवर्गीय परिवार के 14 वर्षीय प्रकाश की नजरें अचानक रिमोट से चलने वाली घंटी
Read Moreतीन दिन से घनघोर बारिश जारी थी । नदी , तालाब , नाले तो ठीक सडक के गड्डे पोखर
Read Moreपहली किलकारी सुनने से पहले ही अविनाश ने बच्चे का कमरा तो तैयार करवा दिया था पर किसी कारण वश
Read Moreकंधे पर बैग लटकाए एक युवक बस पर चढ़ा। सामने एक भी सीट खाली नहीं थी। पीछे की ओर नजरें
Read More“नौ महीने तक जिसको धरती के समान धैर्य से गर्भ में धारण किए रखा और पांच साल जिस बेटे को
Read Moreबृद्धाश्रम में महफिल जमी हुई थी । इधर उधर की बातें हो रही थी । उन सब में एक वसुधा
Read Moreरीमा एक पड़ी लिखी जागरूक महिला है। वह हर वह काम करना चाहती है जो पुरुष करता है। वह भी
Read Moreशिक्षक महोदय आज सेवानिवृत्त हो रहे थे, मगर वे खामोश थे, अंदर चल रहे मनोभावी तूफानों से वे विचलित तो
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