मायका वर्सेज ससुराल (लघुकथा)
“पापा, आप तो अक्सर कहा करते हैं कि मैं बेटा और बेटी में कोई भी फर्क नहीं करता, पर मैं
Read More“पापा, आप तो अक्सर कहा करते हैं कि मैं बेटा और बेटी में कोई भी फर्क नहीं करता, पर मैं
Read More“सौम्या, तुम इतनी सादी साड़ी और साधारण मेकअप में साहित्यिक कार्यक्रम में जाओगी? तुम्हारे कहानी संग्रह का आज विमोचन भी
Read More“सलाम साहेब जी। मंत्रीजी से मिलना है मुझे।”“अपॉइंटमेंट है आपका ?”“उसकी हमको जरूरत नहीं होती साहेब।”“क्यों ? क्या आप उनके
Read More“देखिए भाभीजी, हरीश भाई साहब ने अपने ओफिसिअल रिकॉर्ड में नॉमिनी में आपका नाम वाइफ के रूप में नहीं लिखा
Read Moreबरसात का मौसम था, एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश में रामनाथ के मिट्टी के मकान की खपरैल से
Read Moreमेरी माँ मर गई है,उसे शमशान तक सजा-धजाकर ले जाने की तो सामर्थ्य नहीं है मुझमें,आखिर क्या करूँ..? जो इस
Read Moreट्रिन…ट्रिन…ट्रिन । मोबाइल की घंटी बज रही थी, मैं पूजा कर रहा था, श्रीमती जी ने फ़ोन उठाया और
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