लघुकथा – सुख
एक खानदानी अमीर जिसके पिता और दादा ने चाँदी की थाली और सोने के चम्मच में खिलाया था। सेठ सोच
Read Moreएक खानदानी अमीर जिसके पिता और दादा ने चाँदी की थाली और सोने के चम्मच में खिलाया था। सेठ सोच
Read More“बेटा सोमू! तुमने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली, रिजल्ट भी आ गया।अब तुम ज़ल्दी से कोई काम करने लग जाओ,
Read Moreछोटे से अक्षय का जन्मदिन था। रवीना ने पूरे सोसाइटी के बच्चो को और अपनी कुछ सखियों को भी निमंत्रित
Read Moreकल हमारे प्रिय पोते आरोह कुमार तिवानी का जन्मदिन था. स्वभावतः सुबह नाश्ते में कुछ मीठा बनना था. हमने सबकी
Read Moreअपने रिश्तेदार की शादी में सास अपने दोनों बेटों और बहुओं के साथ गाँव आई थी। दोनो बेटे सरकारी जॉब
Read Moreआज रवीना को टहलने में अंधेरा हो गया था। पर आदत से मजबूर वह आगे बढ़ती गयी। चारो ओर बरसो
Read Moreलाश के पास खड़ी शिप्रा थर थर कांप रही थी तभी रवि ने घर के भीतर प्रवेश किया | शिप्रा
Read Moreदिन भर की भाग दौड़ करके भी मेहनत उस के पल्ले नहीं पड़ रही थी। अपनी डिग्रियां सम्भाल कर कितने
Read More“पच्चीस रुपए प्रति किलो के हिसाब से हफ्ता भर के लिए ही चावल ले आना। घर में एक दाना नहीं
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