दोहा
जिसने जब जब भी किया,गुरूओं का अपमान।कभी नहीं वो पा सका,इस दुनिया में मान।। अगर किसी चाणक्य का,हुआ कहीं अपमान।नन्द
Read Moreकहिये मेघों से जरा, ना बरसे घनघोर,नदी उफनती बह रही, साजन हैं उस छोर। गरज रहे हैं बादरा, आंधी का
Read Moreजलकर खाक मकान है, रोए हर दीवार।माफ़ी से कब जुड़ सके, टूटा अब संसार॥ चूल्हे, चौखट, छत जली, जले सभी
Read Moreचलन बहू का क्या कहूं, फूटी है तकदीर।घर में मुझको मिल गई, बेढंगी तस्वीर।।१. घूंघट में थी सादगी, उसे बताएं
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