यमराज चालीसा
-: दोहा
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Read Moreजन्मदिवस पर लाल के, सुनें एक फ़रियाद।सौरभ सदा बहादुर की, सीखों को रख याद ।। करो-मरो की गूँज से, गूँजा
Read More-:दोहा:-जय मोबाइल मातु की, महिमा बड़ी महान।तन, मन,
Read Moreघर-घर में रावण हुए, चौराहे पर कंस ।बहू-बेटियां झेलती, नित शैतानी दंश ।। मन के रावण दुष्ट का, होगा कब
Read Moreतन-मन अर्पित कर चला, रक्षा में बलिदान।इतिहासों में गूंजता, आज भगत जय-गान।। भगत सिंह, सुखदेव क्यों, खो बैठे पहचान?पूछ रही
Read Moreभोजन लेते भर-भरकर हम, थाली में।थोडा खाते बचा फेंकते, नाली में।व्यर्थ बहाकर पानी करते, नादानी–कूड़ा करकट अटका रहता, जाली में।।
Read Moreधार्मिक चित्रगुप्त जी कीजिए, अपने जन का ध्यान।भूल चूक को माफ कर, भरो सभी में ज्ञान।।१६,१६ गणपति जी को नमन
Read Moreअपनापन की आड़ में, बढ़े स्वार्थ का भाव।मीठी वाणी बोलकर, देते गहरे घाव।।आया ये कैसा समय, कैसा इसका रंग,सजग सदा
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