बचपन
चोट लगती जब किसी को, रोने लगता दूसरा,दर्द के भी दर्द का अहसास करना सीखिए।छल कपट अहंकार क्या, जाने नहीं
Read Moreरोटी की मजबूरियाँ, छीन गई पहचान,बचपन बोझा ढो रहा, सूना हर अरमान॥ हाथों में गर कलम हो, लिखते नए विचार,आज
Read Moreदोषारोपण कर रहे, अब अपने ही लोग।तेजी से है बढ़ रहा, कोरोना जस रोग।दोषी भी हम आप हैं, देख रहे
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