दोहा
अपने ही करने लगे, अब पीछे से वार।मौका सदा तलाशते, घोंपें पीठ कटार।। कभी नहीं हम जा सके, वादा किया
Read Moreकभी आप मत कीजिए, जानबूझकर पाप।नाहक लेने से भला, दूर रहे संताप।समझदार हो खुद बड़े, फिर भी देता सीख-अच्छा होगा
Read Moreरूप चाँदनी भा रही, रही आज मन मोह।अंतर्मन में नेह है,हर पल है आरोह।। सन्नाटा छाया हुआ,चुप है हर आवाज़।सुर
Read Moreसूरज आतिश बन गया,तपे नगर सब गाँव ।जीवों में अकुलाहटें,ढूंढ रहे सब छाँव ।।(१) लू चलती है गति लिए,बिलख रहा
Read Moreआया कैसा नया जमाना, देख-देखकर दंग। कैसा हुआ आज का प्राणी, पल-पल बदले रंग।। आम आदमी सोच रहा है, कैसे
Read Moreहो ममता की नींव पर, घर का पक्का रंग।मगर दरारें जब पड़ें, बिखरे रिश्तों संग।। रिश्तों की दीवार पर, लगे
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