धोते अपने पाप
गलती अपनी मानना, लगता भारी पाप।शनि-मंगल पर डालकर, धोते अपने पाप।। कर्मों में जब छेद हों, ग्रह बन जाएँ ढाल।कुँडली
Read Moreगलती अपनी मानना, लगता भारी पाप।शनि-मंगल पर डालकर, धोते अपने पाप।। कर्मों में जब छेद हों, ग्रह बन जाएँ ढाल।कुँडली
Read Moreनन्हे हाथों में छुपा, सपनों का संसार।मेहनत से ही खिल उठे, जीवन का हर द्वार।। सूरज रोज़ सिखा रहा, उठकर
Read Moreकाम नहीं, बस एक्ट है, आरोपों की रेट।एटीएमों-सा खुला, बन बैठा पैकेट।। काम नहीं, बस शोर है, धारा बनती ढाल।निर्दोषों
Read Moreकंठ रुँधा है नयनद्वय, बहा रहे हैं नीर।मन के भीतर दर्द है, कौन समझता पीर॥ आँखों में सावन बसा, अधरों
Read Moreकाँटों ने भी ओढ़ ली, फूलों जैसी शान।देख रहे माली खड़े, किसका करें बखान।। रंग-बिरंगे फूल हैं, खुशबू सबकी खास।नकली
Read Moreझूठ सजाकर सत्य-सा, करते खूब प्रचार।क्लिकों फँसी इस भीड़ में, बिकता है व्यापार।। चेहरा बदला, बोल भी, बदला पूरा हाल।डीपफेक
Read Moreमाटी से रिश्ता रहे, मन में हो विश्वास।आँधी चाहे ज़ो करे, ना छोड़े हम आस।। धूप मिली तो तप गए,
Read Moreनन्हे हाथों सीखता, ज्ञान भरी हर बात।पढ़-लिखकर आगे बढ़े, रोशन हो दिन-रात।। टैबलेट पर पाठ पढ़, मन में नई उड़ान।ज्ञान
Read Moreछोटा हूँ तो क्या हुआ, मन में बड़ा विचार।बूँद-बूँद से भर रहा, सागर का भंडार।। नन्हा दीपक क्या करे, पूछे
Read Moreमाटी से रिश्ता रहे, मन में हो विश्वास।आँधी चाहे ज़ो करे, ना छोड़े हम आस।। धूप मिली तो तप गए,
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