इतिहास
वह था एक जर्जरघर का , उपेक्षित कमराइतिहास के किसी एक गर्वितदुर्ग में,जो सबसे उच्च होनेके भ्रम में थामगर उसे
Read Moreरील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
Read Moreरिश्तों की चुपचापएक मीठी सी हवादिल को छू जाती है बिना कहे भी सबबहुत कुछ कह जाते हैंअपनेपन के रंग
Read Moreपहाड़ों का सीना चीरकर जोचश्मे बाहर आते हैं,वे पानी का बहाव नहीं, धरतीकी धड़कन बन जाते हैं।जब टकराते हैं राहों
Read Moreशहरों की अंधी दौड़ से जबथककर चूर होते हैं,तब इन अडिग पहाड़ों के हमथोड़े करीब होते हैं।ये वीर वन,ये ऊंचे
Read Moreमाया में हर जन फँसा, बना हुआ है हीन।ठगनी उसको ठग रही, और संग में दीन।।और संग में दीन, कौन
Read Moreनहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी। जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
Read Moreझुक कर ज़रा वो मस्त निगाहें मिला के ला,साग़र में अक्स-ए-ज़ुल्फ़ का जादू जगा के ला। कहते हैं बज़्म-ए-शौक़ में
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