कविता – बच्चे को मारिए मत, उसका मन पढ़िए
जिस हाथ को पकड़कर उसने दुनियाँ में चलना सीखाउसी हाथ से पड़े थप्पड़ ने रिश्तों से डरना सीखा,वह चुप हो
Read Moreजिस हाथ को पकड़कर उसने दुनियाँ में चलना सीखाउसी हाथ से पड़े थप्पड़ ने रिश्तों से डरना सीखा,वह चुप हो
Read Moreदिन रात मोबाइल म लगे हें,बाबू अउ नोनी मन,रील्स बना के नाचत गावत,भुलगे हें सब पढ़ई लिखई के धन,गली-खोर म
Read Moreसुनसान जगह परएक कवि बैठा हैकुछ कवितायें लिख रहा हैअब वह बूढ़ा हो गया हैमैंने पूछा,आप अब सूखे पेड़ हो
Read Moreभगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।देशप्रेम की ज्योति से, रोशन हो हर साँस।। माटी पर कुर्बान थे,
Read Moreमाटी अब भी पूछती, कहाँ गए वे लाल।जो रक्त बहा लिख गये, आज़ादी का भाल।। फाँसी चढ़कर दे गए, हँसकर
Read Moreगरीब देश की ऊँची कुर्सी, अफसरशाही का अंदाज़,जनता प्यासी, सूखे हलक, मेज़ों पर पानी का राज़।कहीं नलों में पानी गायब,
Read Moreजितना रोकना था रोक चुके,जितना टोकना था टोक चुके,अभी बनाना पहचान बाकी है,बिटिया की लंबी उड़ान बाकी है।देवी,देवता,आस्था,संस्कार,थामे हुए थी
Read Moreआती है जब रात तो, थमता दिन का शोर।चुपके से फिर जागते, मन के सारे छोर॥ आती है जब रात
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