पद्य साहित्य

गीत/नवगीत

कोचिंग संस्कृति के चौराहे पर

शिक्षा थी संस्कार की, ज्ञान-ज्योति का धाम।अब बाजारों में बिके, उसका पावन नाम।। विद्यालय के द्वार से, घटता अब विश्वास।कोचिंग

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कविता

ग़ाँव – एक दर्पण

गाँवयानि गरीबीफटेहाल जिन्दगीऔरकुछ गन्दगी। गाँवयानि सन्तुष्टिमानवता -निश्छलताप्रकृति से नजदीकीछल रहित जिन्दगी। गाँवयानि परम्पराओं का निर्वाहईश्वर में आस्थाशिक्षा का अभावसंस्कारों का

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