दो महापुरुष, एक तिथि और हमारा धर्म
दो ज्योतियाँ जगी थीं, भारत के भाल पर,एक राह सत्य की, एक स्वाभिमान पर।एक ने अहिंसा से, तोड़ा था अहंकार,दूजे
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Read Moreसुख की खातिर उम्र भर, सहता मन संताप।मंज़िल फिर भी दूर है, बढ़ता जाता ताप॥ कल के सुख की आस
Read Moreखतरनाक खेल खेला जा रहा हैमानव मानों कठपुतली हो गये हैं,औरत का रुतबा बाहर से भव्य है,किंतु मादा से ज्यादा
Read Moreबूँद मिली जब सिंधु में, मिटा बूँद का भान।मैं-तू का पर्दा गिरा, एक हुआ अरमान। नदिया बनकर चल पड़ी, मन
Read Moreपापा की उँगली थामकर, चलता नन्हा लाल।उसकी प्यारी मुस्कान से, खिलता घर-परिवार॥ पापा का जब साथ हो, डर कैसा संसार।छोटी-सी
Read Moreखुद समाएं किसी समंदर में हम बूंद बनकर,बूंद ही समंदर का अंश हो समंदर बन जाएगी,विशाल समंदर का अनमोल हिस्सा
Read Moreहे हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी,मातु शारदे मैया मेरी, हम शरण में तेरे आए हैं।अंधकार मिटा दो मन का मेरे,ज्योति का दीप जलाए
Read Moreजीवन अनमोल है, इसमें नया क्या हैसवाल जटिल था, जिसे आकर मित्र यमराज ने उठाया,उत्तर देना भी जरूरी था,उसके कोप
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