पद्य साहित्य

कविता

पर्यावरण हुआ कितना प्रदूषित

प्राकृतिक पर्यावरण हुआ कितना प्रदूषित,मनुष्य करते प्रकृति से छेड़छाड़ अनुचित,तीव्र तापमान से जल रहे धूॅं धूॅं कर जंगल,कॉंटे जा रहे

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कविता

सायली छंद

सायली छंद हमारेजीवन काउद्देश्य क्या हैकभी सोचाआपने। व्यर्थक्यों करतेजीवन अनमोल हैतय कीजिएसार्थकता। उद्देश्यछोटा सामेरे जीवन का,करना चाहतादेहदान। बुलबुलापानी काहमारा आपका

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