दोहा
मकरंद ******** फूलों के मकरंद से, बनता शहद मिठास। भंवरों को भी इसी से, होती ज्यादा आस।। बूँद-बूँद मकरंद में,
Read Moreजरुरत है आज संरक्षण कीहम सबके लिए ,पर्यावरण केसबको मिलकर अपने आप के लिए। बंद कीजिए अब पेड़ काटना प्रदूषण फैलाना,वरना कल मांगेंगे भीख हमअपने
Read Moreमैं मंदिर गयामैं मस्जिद गयामेरी रगों मेंमोहब्बत का गीतफिर भीज़रे ज़रे मेंबहता गया । इश्क विश्कथोड़ा-थोड़ाहम भीकिसी न किसी सेकरते
Read Moreव्यूज़ बटोरन को रचें, रोज़ नए संग्राम।घर-आँगन तक बेचते, यूट्यूबर कुछ नाम।। व्यूज़ की इस दौड़ में, कैसा आया दौर,सच
Read Moreधीरे से उतरती हैरात की रेशमी चादर परतुम्हारी याद की आहट बोलते नहीं लफ़्ज़फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैंनज़रों
Read Moreसेपेड़ लगाना ही नहीं, रखना भी है ध्यान।जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।। पाँच जून के दिन सभी, लें
Read Moreगजबे शोर था भाईवो भी अजबे दौर था भाईजब बढ़ रही थी महंगाईतब किसने शोर मचाईसत्ता की लालसा पालेअच्छे दिन
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