ग़ज़ल
जब मुझे रिश्तों की धूप छाँव में जीना पड़ा,हर मोड़ पर किसी न किसी को खोना पड़ा। उम्र भर जिस
Read Moreनारी की पीड़ा सबको दिखे पुरुष की न देखे कोय क्या क्या न वो सहता रखने को घर की लाज
Read Moreआओ हम सब मिल कर,अपनी धरती को स्वर्ग बनायें,हरियाली खेतों में छाये,यहाँ फूलों से उपवन महकाएं,गौ माता की पूजा करके
Read Moreचलो प्रकृति से नजदीकियां बढ़ाएंएक हाथ निःस्वार्थ दोस्ती का बढ़ाएंबनावटी पन सब दूर हो जाएगाजीवन का मर्म समझ में आएगा
Read Moreकिस्मत के हारे हमलो कहां आ गए हमएक मुश्किल रास्ते को पार किए हमदूसरे मुश्किल रास्ते पर फिर आ गए
Read Moreबच्चों को खुलकर खिलखिलाने दो,उनमें “आनंद” भाव जमकर रमने दो,दौड़ता-कूदता, उछलता-खेलता,मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है । बारिश की बूॅंदों संग
Read Moreमानवता खतरे में पड़ी है यह सबको है समझानाप्रकृति से खिलवाड़ नही करना पर्यावरण है बचानाउन्नति के नाम पर जो
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