पद्य साहित्य

कविता

मेरा दंभ : चित्र एक

सोचा थाजिंदगी की तमाम –बातों को सहेज़ करजिंदगी के नाम-एक पाती लिखूँ!इतिहास के पृष्ठों पर-न सहीपर-हासिये पर तो दिखूँ!!पर अफ़सोस-कलम

Read More
कविता

बेटे के नाम पाती

बेटे।मैंने-अपने जीवन ज्योति सेतेरे जीवन-पथ को सजायाउस पर-प्रकाश ही प्रकाश फैलायातेरे अंधेरे को-सदैव गले लगायाजलते-जलतेजब-मेरा जीवन दीपज्योतिहीन हो गयामेरा उजालातेरे

Read More