बकरापुर की होली
होली के दिन बकरापुर में, शेर घुसे गुर्राते भाग घरों में दुबके बकरे, अपनी जान बचाते छूट गये उनके हाथों
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Read Moreलाल – हरे तुलसी के पत्ते। लगते तीखे जब हम चखते।। कहती दादी अति गुणकारी। तुलसी-दल की महिमा न्यारी। वात
Read Moreरात ठण्ड की बहुत बड़ी है, सहज नहीं है अधिक कड़ी है। ठण्ड सताए सही न जाए, और धूप भी
Read Moreगुरुजन, मात -पिता जन बच्चों को देते है संस्कार, जो बच्चा कहा हुआ माने वे ही बच्चे बनते है महान।
Read Moreगाँव शहर में अक्सर लगते हमने देखा है एक मेला । रंग,बिरंगी उस दुनिया में, पल भर भूले सारा झमेला।
Read More1 .चलती रही जिंदगी (क्षणिका) कभी गमों की धुंध कभी खुशियों की धूप कभी सफलता कभी विफलता हौसला और जुनून
Read Moreकल कल प्यारी नदिया बहती,चलते चलते वो कुछ कहती,झूम झूम के चलना है जीवन,पथ की बाधाएँ कभी न सहती। मेले
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