सही मार्गदर्शन
“जब देखो आप उसकी ही बढ़ाई करती हो। आपका लाड़ला है, वह बेटा है न।” स्वाति के मन की पीडा
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Read Moreरोहन एक सफल व्यवसायी था, जो अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसे अपने जीवन में प्रेम की कमी
Read Moreचिपचिपाती गर्मी यूं ही परेशान कर रही थी । रात का सफर था, संतोष था कि चलो कुछ थोड़ा खा-पीकर
Read More“एक ग्लास पानी और चाय लाना, वंदना बहू।” रमेश के पिता परमेश्वर ने अपने समधी पारसनाथ के आते ही कहा।“अभी
Read Moreकूड़े से पन्नी बीनने के लिए दिन भर इधर उधर सड़क पर घूमते रहना ही
Read Moreचौधराइन अनूठी और अप्रतिम व्यक्तित्व की धनी महिला थीं। जो है, सो है; उन्हें कहने में कोई संकोच न होता।
Read Moreआज रिटायर्ड होने पर कॉलेज के हर तरफ आंसू का सैलाब बह रहा था।प्रोफेसर साहब चुपचाप ऑफिस में बैठकर अपने
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