औकात का आईना
शहर के एक बहुत बड़े और प्रतिष्ठित परिवार में बेटी आरोही की शादी की तैयारियाँ पूरे जोर-शोर से चल रही
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Read Moreविधा- कहानीशीर्षक- अगर मैं आज़ादी के दौर में होती! अगर मैं आज़ादी के दौर में होती तो शायद जीवन कुछ
Read More‘ स्व’ और ‘ सवि’‘सवि’ और ‘ स्व’- दो नाम मेरे लिए परिचित हैं। इनकी कहानी को कितनी ही बार
Read More“धूप में खटते जान जाती है तुम्हारी और पैसे तुम्हें पूरे चाहिए, कामचोर पैसे डाल में लगते हैं? ” मुंशी
Read Moreरात के दो बज रहे थे, लेकिन मंजूर साहब की आँखों से नींद कोसों दूर थी। उनके सामने कॉपी का
Read Moreशहर के पोश इलाके में स्थित, संगमरमर से जुड़ा हुआ एक आलीशान बंगला। यह घर डॉ. जाकिर हुसैन का था,
Read Moreकभी-कभी इंसानियत का एक छोटा-सा काम जीवन की सबसे बड़ी दौलत बन जाता है। एक दिन एक नन्ही-सी बच्ची प्यास
Read More“नगर निगम का बुलडोज़र ठीक आठ बजे पहुँचा। भीड़ तमाशा देखने खड़ी थी, पर एक बूढ़ा आदमी अपनी जर्जर किताबों
Read Moreबारिश की शाम थी। शहर के एक छोटे से कैफ़े में हर रोज़ ठीक पाँच बजे एक बुज़ुर्ग आते थे।वो
Read Moreलगभग तीन बज रहे थे। पूरा आकाश काली पुतलियो से घिरा हुआ था। सभी विद्यालय की छुट्टी होने का बेसब्री
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