सहगामिनी
बचपन से ही सुनता आया था माँ बाबूजी ताऊजी और बहनों से- पूत के पांव पालने में ही नज़र आते
Read Moreवह सुनहरी दोपहर थी जब दफ़्तर में दाख़िल हुआ और काग़ज़ पर नज़र डाली, तो पलट कर देखा कि सामने
Read Moreमालिक सेवाराम की तबियत बहुत खराब है। सांस चल रही है। आईसीयू में भर्ती हैं। एक बड़ी कंपनी के मालिक
Read Moreसन 1930 के दशक की शुरुआत का समय था। चटगांव के आसमान पर अक्सर घने काले बादल छाए रहते थे।
Read Moreगांव का नाम था नरसिंहपुर। गांव के आखिरी छोर पर, टूटे हुए कुएं और बरगद के पेड़ के पास एक
Read Moreपुराने मकान की सफ़ाई करते समय बेटे को पिता की वर्षों पुरानी बंद घड़ी मिली। उसने हँसते हुए कहा, “इसे
Read Moreबात उन दिनों की है जब कैलेंडर के पन्ने साल 1982 पर ठहरे हुए थे। मैं श्री नीलकंठेश्वर महाविद्यालय, खंडवा
Read Moreआज सुबह से ही दिल बड़ी जोर से धड़क रहा था ना जाने क्यों ? रह रह कर तुम्हारा चेहरा
Read Moreकाली आँधी, तूफानी बारीश, घनघोर अँधेरा। कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट। झमाझम बरसती बूँदे और तेज हवा से महक का
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