अमीर दोस्त
रमेश के ऑफिस से आने के तुरंत बाद ही सुधा उसपर चिल्ला उठी ,अरे तुमने भी कैसे-कैसे कंगाल लोगों को
Read Moreरमेश के ऑफिस से आने के तुरंत बाद ही सुधा उसपर चिल्ला उठी ,अरे तुमने भी कैसे-कैसे कंगाल लोगों को
Read Moreविदेश में रहते हुए उसे कई वर्ष बीत गए थे। अच्छी नौकरी, अपना घर, पत्नी और बच्चों से भरा संसार—जीवन
Read Moreजब-जब घर की याद आती वह विह्वल हो वृद्धाश्रम से दूर घूमने निकल जाते थे । आज भी सुबह-सुबह घूमते-घूमते
Read Moreविद्यालय का वार्षिक उत्सव समाप्त हुआ और के.जी. में पढ़ने वाली नन्ही मिनी भागकर मीनाक्षी के गले आ लगी। “मम्मी!
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
Read Moreप्रथम अध्याय — “जब हमारा संसार बस एक आँगन था” सूरज की पहली किरण अभी धरती पर पूरी तरह उतरी
Read Moreराघव एक साधारण किसान परिवार का युवक था, जो सेना में भर्ती होकर देश की सीमा पर तैनात हो गया
Read Moreमहानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह भी जैसे घड़ी की सुइयों के इशारे पर होती है। यहाँ लोग बस
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