गृह लक्ष्मी : घर की अदृश्य शक्ति
घर में सब कुछ था—सुविधाएँ, सुकून और व्यवस्थित दिनचर्या…बस, जो नहीं था, वह था उस व्यक्ति का नाम, जिसके बिना
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Read Moreजिस दिन बाबा इस ‘रोज़-ए-फ़ानी’ से विदा हुए, उस दिन आसमान पर घटाएं नहीं थीं, मगर घर के अंदर एक
Read Moreशहला की ज़िंदगी उस सूखी झील की मानिंद हो गई थी जिसके वीरान किनारों पर अब परिंदे भी चहकना भूल
Read Moreआज एक लंबे अरसे के बाद मन के द्वार पर फिर उसी सुंदर क्षण ने दस्तक दी है। वह एक
Read Moreयह दास्तान उस दौर की है जब रियासतों के सूरज ढल रहे थे, लेकिन खानदानी रसूख की तपिश अब भी
Read Moreशहर की सबसे व्यस्त चौराहे के सिग्नल पर बारह साल के राजू के हाथ में कोई खिलौना नहीं, बल्कि एक
Read More“विनी मुझे मेरा घर मेरा सा ही नहीं लगता अब…” सिया की निराश हताश भरी आवाज मुझे अंदर तक झकझोर
Read Moreशहर के शोर से दूर उस पुरानी हवेली की दीवारों पर जमी काई अब सिसकियाँ लेती थी। वह हवेली, जिसे
Read Moreखंडवा कॉलेज की सर्द शामों की यादेंखंडवा के उस पुराने कॉलेज परिसर की सर्द शामें आज भी मेरे दिमाग़ के
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