लघुकथा – हस्ताक्षर
वृद्धाश्रम में रहने वाले एक बुज़ुर्ग रोज़ सुबह सबसे पहले रजिस्टर खोलते और अपने काँपते हाथों से अपने नाम के
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Read Moreपति की मृत्यु के बाद शिला ने कारोबार का सारा बोझ अपने सिर ले लिया। आखिर करती भी क्या, पेट
Read Moreपढ़ाई में होशियार नवोदित धाविका सीता के सपने बड़े थे, मगर परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। जूनियर वर्ग
Read Moreमैं उस दिन स्कूल में बतौर परीक्षक-इम्तिहान मौजूद था। स्कूल के हॉल में ख़ामोशी का राज़ था, सिर्फ़ क़लम के
Read Moreकॉलेज का पहला दिन आज भी याद है। नए चेहरे, नई कक्षाएँ और दिल में अनगिनत सपने। शुरुआत में सब
Read Moreहर वर्ष की भांति इस बार भी माहेश्वरी जी अनाथ कन्याओं के कन्यादान का पुनीत कार्य कर रही थीं। विवाह
Read More“मम्मी, अभी नहीं… शाम को ले आएँगे।” मेरे इतना कहते ही माँ की आँखें कहीं दूर टिक गईं। धीमे स्वर
Read Moreशिक्षकीय जीवन में प्रतिदिन न जाने कितने चेहरे सामने आते हैं। कुछ चेहरे समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं,
Read Moreबारिश कह रही थी मानो आज ही बरसना है, सिर्फ एक किलोमीटर दूर मंज़िल.. पर मंज़िल तक जाना ही सबसे
Read Moreमैं अपने बीमार और वृद्ध पिता को काशी के मुक्ति भवन ले जा रहा था। मन में एक ही उम्मीद
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