काँच के बर्तन
अम्मा को, जब से हमने होश संभाला था, बस एक ही बात बार-बार दोहराते देखा था—“अच्छी चीज़ को रोज़ इस्तेमाल
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Read Moreवैसे तो बेटियों को हर पल मायके की याद आती है, लेकिन सावन के आते ही सभी बेटियों-बहिनों को मायके
Read Moreहरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी
Read Moreसूरज के मोबाईल पर मैसेज आया कि देश के साहित्यकारों की रचनाओं का एक वृहद ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है |
Read Moreसम्मान समारोह में जब मंच से उसका नाम पुकारा गया, तो उसने तालियों की ओर नहीं, आख़िरी पंक्ति में बैठी
Read Moreसमय चक्र घूमता रहा। मालती अपने परिवार के सुख-दुःख में ऐसे उलझी रही कि मायके जाकर अपने माता पिता के
Read Moreदिल्ली की वह शाम कुदरत का कोई नायाब करिश्मा थी। आसमान सुर्ख लाल रंग में रंगा था और हवाओं में
Read Moreबारिश भी मौसम-बेमौसम आती रहती है और यादें भी! फिर जब बारिश हो, हाथ में गर्मा-गर्म चाय का प्याला हो,
Read Moreसवा दो साल की बिटिया बैंककर्मी माँ की निगाह में स्कूल जाने योग्य हो गई थी। माँ ने उसे घर
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