दादी की महक
ऐसा पहली बार हुआ था कि नंदिनी घर से बाहर निकली और आदतन पलटकर पीछे देखा, पर उसे विदा करने
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Read Moreऑफिस की लिफ्ट खराब थी। 8वीं मंजिल। बॉस ने सुबह ही कह दिया था – “रिपोर्ट आज चाहिए, नहीं तो
Read Moreगांव के बाहरी छोर पर बने उस पुराने घर में कभी बहुत रौनक हुआ करती थी। घर के आंगन में
Read Moreबुज़ुर्ग असलम साहब ने अपनी पूरी ज़िंदगी का एक-एक तिनका जोड़कर अपने इकलौते बेटे, फ़रहान, को इस क़ाबिल बनाया था
Read Moreशहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, ऊंची इमारतें और मसनूई रोशनियां कभी कभार इंसान को अंदर से बिल्कुल ख़ाली कर देती
Read Moreमेरे पिताजी छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन्होंने उम्र से पहले जिम्मेदारियों का भारी बोझ अपने कंधों पर उठा
Read Moreबुधिया के गाँव में सरकारी योजनाएं आईं — राशन, गैस, बिजली बिल माफी, नकद। बुधिया खुश था।पहले साल उसने काम
Read Moreउस बड़े से पुश्तैनी ज़मीन की में अगर किसी का पसीना और त्याग छुपा था, तो वह सिर्फ़ बड़ा भाई
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