हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

समय की अहमियत

भोर की किरण,क्षणों का उपहार,जीवन जागे। बहती नदी,रुकती नहीं कभी,समय कहे। सूखा पत्ता,हवा संग उड़ता,पल बीते। खिला सुमन,संध्या में झरता,काल

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हाइकु/सेदोका

रोपनी में रौंदल देहिया

माटी की खुशबू,रोपनी में झुकी देहिया,बरखा मुस्काई। धान के नन्हे पौधे,हाथों में सपनों की हरियाली,धरती गुनगुनाए। कीचड़ भरे पग,फिर भी

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हाइकु/सेदोका

शाश्वत की सुगंध

ओस की बूँद,भोर मुस्काए,सुगंध अमर। वन की साँस,पत्ते गुनगुन,जीवन जागे। नभ निर्मल,चिड़िया का स्वर,मन महके। शांत सरिता,लहरें बोलें,काल ठहरे। फूल

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हाइकु/सेदोका

गीली सड़क

गीली सड़कें, सुंदर तो लगतीं,दुख भी देतीं। सड़क होती,वर्षा से जब गीली,फिसलें लोग भी। सड़क गीली, साफ सुथरी दिखें,दुर्घटना भी। सड़कें  गीली, हरियाली

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हाइकु/सेदोका

यत्र तत्र सर्वत्र

यत्र तत्र,जीवन की धुन,प्रकृति गाए। शीतल पवन,पत्तों की भाषा,मन मुस्काए। नीला गगन,उड़ते पंछी,स्वप्न सजाएँ। ओस की बूँद,सूरज की किरण,मोती बन

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हाइकु/सेदोका

इरादों में कमी कैसे आई

धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र

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हाइकु/सेदोका

प्रकृति की गोद में

ओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती

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हाइकु/सेदोका

अतीत की यादें

पुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद

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हाइकु/सेदोका

जाते ही श्मशान में मिट गई दूरियां

जीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन

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