समय की अहमियत
भोर की किरण,क्षणों का उपहार,जीवन जागे। बहती नदी,रुकती नहीं कभी,समय कहे। सूखा पत्ता,हवा संग उड़ता,पल बीते। खिला सुमन,संध्या में झरता,काल
Read Moreभोर की किरण,क्षणों का उपहार,जीवन जागे। बहती नदी,रुकती नहीं कभी,समय कहे। सूखा पत्ता,हवा संग उड़ता,पल बीते। खिला सुमन,संध्या में झरता,काल
Read Moreमाटी की खुशबू,रोपनी में झुकी देहिया,बरखा मुस्काई। धान के नन्हे पौधे,हाथों में सपनों की हरियाली,धरती गुनगुनाए। कीचड़ भरे पग,फिर भी
Read Moreडालें टूटी हैंगौरैया कहां बैठेकिससे कहे फुदकती थीजिस अंगना, वो भीखत्म हो गए वन्य नहीं मैंहूं, घरेलू चिड़ियाजैसे बिटिया —
Read Moreओस की बूँद,भोर मुस्काए,सुगंध अमर। वन की साँस,पत्ते गुनगुन,जीवन जागे। नभ निर्मल,चिड़िया का स्वर,मन महके। शांत सरिता,लहरें बोलें,काल ठहरे। फूल
Read Moreयत्र तत्र,जीवन की धुन,प्रकृति गाए। शीतल पवन,पत्तों की भाषा,मन मुस्काए। नीला गगन,उड़ते पंछी,स्वप्न सजाएँ। ओस की बूँद,सूरज की किरण,मोती बन
Read Moreधूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र
Read Moreओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती
Read Moreपुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद
Read Moreजीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन
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