गणराज्य का स्वधर्म
जन की आवाज़ उठे,सत्य और न्याय का दीप,अंधकार मिटे। कानून का बंधन,सबके लिए समान राह,धर्म का संकल्प। सुरक्षित मन और,स्वतंत्र
Read Moreजन की आवाज़ उठे,सत्य और न्याय का दीप,अंधकार मिटे। कानून का बंधन,सबके लिए समान राह,धर्म का संकल्प। सुरक्षित मन और,स्वतंत्र
Read Moreधूप उधार लोतो छाँव भी माँगेअपनी नहीं लगती कर्ज़ की तलवारचमकती है पल भरहाथ ही काटे उधार का साहसभीतर से
Read Moreअनुभव बोलते हैंमौन में भी अर्थ भरतेजीवन समझाते ठोकरें राह कीचलना हमें सिखलातींआँखें खोल जातीं कठिन क्षणों मेंमन का दीपक
Read Moreसूनी मेज़ परहवा पलटती पन्नेस्याही ठिठकी चाय की भाप मेंअधूरे वाक्य तैरेंशाम धीमी खिड़की के बाहरपीपल की पत्तीसुनती शब्द काग़ज़
Read Moreसुबह की धूपकलाई पर बंधीउम्मीद की रेखा खामोश हवाटूटी साँसों मेंविश्वास भर दे सूखा आँगनएक बूंद हौसलाहरियाली लाए झुकी पलकेंफिर
Read Moreबिखरे से सपनेसुबह की ओस जैसेचुपचाप चमकते टूटे हुए पलहवा में तैरते हैंयादों के संग अनकही बातेंखामोशी में लिखीदिल की
Read Moreसुबह की धूप मेंममता की छांव मिलीजीवन संवर गया बूँद बूँद सीखतेउनकी बातें सुनकरसपने बड़े हुए सर्द हवाओं में भीउनकी
Read Moreज्ञान की पहली किरणअंधकार चुप हो जाएमन जाग उठे शब्दों का दीपकजीवन-पथ आलोकितभय दूर भागे पुस्तक की खुशबूसोई हुई चेतना
Read Moreभोर की पहली धूपखिड़की से झाँकतीमन को छू जाती है चाय की भाप मेंबीते कल कीमुस्कान तैरती पत्ते पर ठहरीओस
Read Moreभोर की चुप्पीदीपक की लौ काँपीरात पीछे हटी ओस की बूँदपत्ते का मौन स्पर्शसूरज मुस्काया छाया सिमटीकदमों में रोशनीरास्ता जागा
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