पुस्तकें बिकती हैं, पाठकीयता नहीं
किताब छापी जा सकती है, प्रदर्शित की जा सकती है, उसका विज्ञापन किया जा सकता है, उस पर छूट दी
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Read Moreएक पिता को मिला तिरस्कार वीडियो काल पर..अंतिम विदाई..आज कलम भी बदहवास है,कलम की स्याही भी उदास है!ता उम्र सदैव
Read Moreछपे हुए पन्ने एक किताब से बढ़कर कुछ नहीं होते। ये लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ, कल्पना और वर्षों की
Read Moreकिसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों के हाथों में होता है और बच्चों का भविष्य उनकी शिक्षा, संस्कार तथा
Read Moreसभ्यताएँ अपनी सबसे बड़ी पूँजी स्मारकों में नहीं, उन विचारों में बचाकर रखती हैं जो पीढ़ियों का हाथ थामे रहते
Read Moreकभी वह कहता था“मैं भी लिखता हूँ…” इस वाक्य में विनम्रता थी, सीखने की भूख थी, शब्दों के प्रति प्रेम
Read Moreसाहित्य केवल शब्दों का जोड़ या कोरी कल्पनाओं का आख्यान नहीं है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अंतरात्मा की
Read Moreइसमें किसी को भी संदेह नहीं है, कि जब भी कभी साहित्य की चर्चाओं में, कहानियों के बारे में कभी
Read Moreभारतीय साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान केवल एक महान कथाकार या उपन्यासकार के रूप में नहीं है,
Read Moreशब्दों से समाज की आत्मा लिखने वाले साहित्यकार विरले होते हैं। 31 जुलाई केवल जन्मतिथि नहीं, उस युगदृष्टा का स्मरण
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