भाषा-साहित्य

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देवेन्द्र माँझी का साहित्यिक अवदान: एक विस्तृत विवेचन

समकालीन हिंदी और उर्दू साहित्य के परिदृश्य में देवेन्द्र माँझी एक अत्यंत सशक्त, बहुमुखी और प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं। देवेन्द्र माँझी

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प्रगतिशील लेखक संघ, इलाहाबाद में बदलाव की आवश्यकता

प्रगतिशील लेखक संघ, इलाहाबाद पुरानी उर्जा लिये हुये आगे बढ़ रही है। समय-समय पर साहित्यिक चर्चा कर लेती है। थोड़ा

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हमारी भाषाएँ मर रही हैं, हम अंग्रेज़ी में उनका श्राद्ध कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट का हालिया प्रश्न — क्या अंग्रेज़ी को भारत की स्वदेशी भाषा माना जा सकता है?—सिर्फ न्यायालय का सवाल

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भावी पीढ़ी द्वारा क्षेत्रीय बोली को विलुप्त होने से बचाना होगा

चिंता इस बात की है कि हजारों बोलियों में से आधे से ज्यादा खत्म हो चुकी हैं? क्योंकि, अब उन

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क्या हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी साहित्यकारों की अपेक्षाओं पर खरी उतर रही है?

साहित्य किसी राष्ट्र की आत्मा का सबसे निर्मल स्वर है और साहित्यकार उस स्वर के अनथक साधक। वे शब्दों में

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व्याकरण शास्त्री व साहित्यकार की दृष्टि में जीवन दर्शन

प्रस्तावनाजीवन एक रहस्यमय यात्रा है — जिसे व्याकरण शास्त्री शब्दों की संरचना में देखता है और साहित्यकार भावनाओं के प्रवाह

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