भाषा-साहित्य

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सृजन और समीक्षा: एक दूसरे के पूरक

सृजन और समीक्षा दो ऐसे पहलू हैं जो किसी भी रचनात्मक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सृजन वह प्रक्रिया

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डा. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी का वैयक्तिक आंकलन

दि  टुडे प्रकाशन समूह के संपादक डा. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी का एक निहायत सरल सहज के सामाजिक व्यक्ति हैं।

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देवनागरी से डिजिटल मस्तिष्क तक: हिंदी की सभ्यतागत यात्रा

जब कोई भाषा युगों की चेतना को समेटे हुए भविष्य की तकनीक से संवाद करने लगे, तब वह केवल संप्रेषण का

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हिन्दी और हरियाणवी साहित्य के सजग प्रहरी : डॉ. शीलक राम आचार्य

भारतीय साहित्य की परंपरा जितनी प्राचीन है, उतनी ही व्यापक और बहुरंगी भी है।यह हजारों वर्षों से वैदिक संस्कृत,लौकिक संस्कृत

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महामना मालवीय सम्पूर्ण वाङ्मय : एक महान् विरासत

महामना पं. मदन मोहन मालवीय एक महान विभूति हैं। सामान्यतया लोग उनको केवल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक के रूप

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भारतीय भाषाओं का वैज्ञानिक और तकनीकी संरक्षण जरूरी

भारत देश संस्कृति, भाषाओं, उपनिषद साहित्य से पिरोई ऐसी ख़ूबसूरत माला है जो वैश्विक रूप से अनमोल है इस भारतीय

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किताबों में बंद कहानियाँ हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक विकास का आधार हैं

किताबें केवल काग़ज़ के पन्नों का ढेर नहीं होतीं। ये मानव के सदियों पुराने अनुभव, ज्ञान, आशाएँ और आँसुओं का

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भाषाओं पर मंडराता मंडराता विलुप्ति का खतरा

वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का ऐसा उपकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो

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