गाँव की हर चीज़ चाहिए, लेकिन गाँव नहीं चाहिए
“गाँव की हर चीज़ चाहिए, लेकिन गाँव नहीं चाहिए।” यह एक साधारण-सा वाक्य नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज की बदलती
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Read Moreजीवन के इस कठिन और तेज़ रफ़्तार दौर में जहाँ हर इंसान अपनी ही दुनिया, अपने स्वार्थ और व्यस्तता के
Read More‘तेरी मेरी यारी’… यह महज़ दो शब्दों का एक जुमला नहीं, बल्कि ज़िंदगी का वह सबसे ख़ूबसूरत एहसास है जिसमें
Read Moreजीवन कुछ सच बहुत देर से खोलता है। उनमें सबसे गहरा सच यह है कि माँ का अर्थ तब समझ
Read Moreसभ्यता का सबसे गहरा घाव किसी युद्ध, महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं, उस चमकती स्क्रीन ने दिया है जिसे
Read Moreजहां दो तरफा जिंदगी वेंटिलेटर पर होती है।आईसीयू का वो बंद दरवाजा… जिसके अंदर मशीनों की बीप-बीप है और बाहर
Read Moreजब जीवन बहुत कुछ सिखा देता है, तब इंसान हर आवाज़ का जवाब देना और हर लड़ाई लड़ना छोड़ देता
Read Moreभारत में अवैध घुसपैठ हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा रहा है, जिस पर हर चुनाव और संसद
Read Moreबचपन से ही हमें यह सिखाया गया है कि हमारे देश में सड़कों पर बायीं ओर ही चलना चाहिए, दायीं
Read Moreकुछ फैसले दिमाग में नहीं, मनुष्यता की भीगी तहों में जन्म लेते हैं। वे तर्क से नहीं, अनदेखे दर्द की
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