धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

संतोष से दूर, संकट के निकट : परिवार की बदलती कहानी

जब संबंधों की जड़ें स्वार्थ की धूप में सूखने लगती हैं, तब सभ्यताओं का मौन पतन शुरू हो जाता है।

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हाइकु/सेदोका

जाते ही श्मशान में मिट गई दूरियां

जीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन

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राजनीति

दल-बदल विरोधी कानून : स्थिरता की गारंटी या लोकतांत्रिक विवेक पर अंकुश?

भारतीय लोकतंत्र की सफलता का आधार केवल नियमित चुनाव नहीं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही, राजनीतिक स्थिरता और जनादेश के

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