प्रेम ही जीने की आस
दिव्य प्रेम राधा का, भक्ति प्रेम मीरा का। बाजीराव मस्तानी, प्रेम हीर रांझा का।। प्रेम के रूप अनेक, माटी से
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Read Moreकाली आँधी, तूफानी बारीश, घनघोर अँधेरा। कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट। झमाझम बरसती बूँदे और तेज हवा से महक का
Read Moreयह गंध बड़ी ही न्यारी है,नेताओं को लगती प्यारी है,चमचों की टोली डोल रही,हर गली सुगंधी घोल रही,यह गंध नहीं
Read Moreहर सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को
Read Moreकभी-कभी इतिहास राजाओं के मुकुट से नहीं, एक साधारण युवक की भींची हुई मुट्ठी से बदलता है। साम्राज्य हमेशा तोपों
Read Moreमन शांत रहेख्वाहिशों का भार न लोनभ मुस्काए आज नाव हल्की रखोसागर पथ सरल हो जाएमौन गीत गाए फूल स्वयं
Read Moreलोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक
Read Moreदिन का कोलाहल सत्य को दबा सकता है, पर रात का सन्नाटा उसे जगा देता है। जब सारी आवाज़ें थम
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