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जय विजय

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गीतिका/ग़ज़ल
डॉ. शैलेश शुक्ला 01/06/202607/05/2026 0 Comments

गज़ल

वो तो हमें खुद से जुदा बताए बैठे हैंहम उन्हें दिल का खुदा बनाए बैठे हैं। वो मिलें या न

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कविता
*सुधीर श्रीवास्तव 31/05/202602/06/2026 0 Comments

श्रम साधक का बहे पसीना

श्रम साधक का बहे पसीना।चाहे सुख से वो भी जीना।।करना चाहे सपने पूरे।जो भी अब तक रहे अधूरे।। श्रम साधक

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गीत/नवगीत
*सुधीर श्रीवास्तव 31/05/202602/06/2026 0 Comments

लोभ मोह में उलझा मानव

लोभ मोह में उलझा मानव,   बनी हुई है पीर।कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।। इस दुनिया की गजब कहानी,

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कविता
गंगा मांझी 31/05/202631/05/2026 0 Comments

कविता

जिंदगी की सारी मौज खत्म हुईअब जिंदगी शुरू हुईरास्ते का न कोई हमसफर, न कोई मंजिलएक राही की तरह अब

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कुण्डली/छंद
*चंचल जैन 31/05/202631/05/2026 0 Comments

हंसगति छंद 

रवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी  बेहाल,  प्यास  तरसाती।। लू से  बचना  आप,  छाँस  हैं  पीना। बरगद की

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कुण्डली/छंद
*चंचल जैन 31/05/202631/05/2026 0 Comments

अरुण छंद

कौन है, चाहता, नाश हो  जोश का। दे नशा, छल करें, हौसला  होश का।।  देश  को लूटते,  भ्रमित  मन  हैं

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कविता
*चंचल जैन 31/05/202631/05/2026 0 Comments

लक्ष्मण रेखा

नारी संस्कार बीज बोएगी,  जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब

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कविता
*चंचल जैन 31/05/202631/05/2026 0 Comments

मेरे अपने

मेरे अपने, सजाये थे जिन्होंने, सतरंगे सपने, माटी को संस्कारों की छिन्नी से, गढ़ा था बड़े अरमानों से, स्नेह से,संयम

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कविता
*सविता सिंह 'मीरा' 31/05/202631/05/2026 0 Comments

अर्द्धनारीश्वर

मैं हूँ स्त्री, मैं ही पुरुष, अर्द्धनारीश्वर की हूँ कृति,फिर क्यों जग के इस आँगन में, होती हमारी दुर्गति? हाँ

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कविता
राजेन्द्र लाहिरी 31/05/202631/05/2026 0 Comments

शब्द

अक्सर मैं रातों मेंटकटकी लगायेतारों को निहारता हूँ,मेरी भावनाओं के हिसाब सेशब्दों को पुकारता हूँ।शब्द-सागर से मंथन के बादअमृत-कलश निकालता

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सम्पादक : डाॅ विजय कुमार सिंघल

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