दोहा मुक्तक
कभी आप मत कीजिए, जानबूझकर पाप।नाहक लेने से भला, दूर रहे संताप।समझदार हो खुद बड़े, फिर भी देता सीख-अच्छा होगा
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Read Moreबचपन से ही आर्थिक धूप- छांव में पली नमिता । रोजमर्रा की जरूरते तो जरूर पूरा हो जाता लेकिन कभी
Read Moreचार दिव्य वृक्ष और उनके उपयोग की विधियाँ(स्वास्थ्य, परंपरा और प्रयोग का अद्भुत संगम) भारतीय जीवन दर्शन में प्रकृति को
Read Moreशहर छोड़ लौट चलूं अब वापिस अपने गांव गांव छोड़ शहर आया था कुछ पाने और कमाने किया हिसाब तो
Read Moreशून्य से शिखर तक का, जिसने पथ बनाया है,कड़कती धूप में जिसने, खुद को ही जलाया है।वह मात्र एक देह
Read Moreमज़दूर के पसीने से मुहब्बत कौन करता है,ऊंची हवेली के लिए खड़ा है,जो रोशनी लेकर। वह निकला था सुबह गर्मी
Read Moreमजदूर दिवस केवल एक तिथि विशेष का उत्सव या कैलेंडर का कोई लाल पन्ना मात्र नहीं है, बल्कि यह उस
Read Moreमजदूर दिवस बीत गया—एक ऐसा दिन, जब मंचों पर श्रम की महत्ता के गीत गाए गए, भाषणों में गरीब, किसान और मजदूर वर्ग
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