लघुकथा

कर्ज

आज रामू काका की बेटी संध्या का आईआईटी में प्रवेश का परिणाम आया।सब बहुत खुश थे कि एक गरीब की बेटी तमाम आर्थिक झंझावातों के बीच सफलता की सीढियां चल रही थी,खुद रामू को तो जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था ।उनके लिए तो ये सब सपना जैसा था।क्योंकि बेटी को उँचाई पर देखने […]

लघुकथा

अभी ही देख लो!

”प्रातःभ्रमण करके आ रहे हो?” उसने पूछा. ”जी हां, बचपन से ही आदत जो बनी हुई है! इसके बिना चैन कहां?” ”क्या देखकर आए हो!” ”वही, जो रोज दिखाई देता है. फूल-पत्ते, चिड़ियां-तितलियां. हंसते-मुस्कुराते चेहरे, मन खुश हो जाता है.” ”जो देखना है, अभी ही देख लो!” उसने फिर कहा. ”क्या मतलब?” ”अंतर आपने शायद […]

लघुकथा

गाँधी गिरी

  राजू एक नवी कक्षा का छात्र है और अपने घर के पास ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ता है।राजू बचपन से ही पढ़ने बहुत होशियार विद्यार्थी है।लेकिन उसके दिमाग की सारी अच्छाइयां उसके गणित के अध्यापक के सामने खत्म हो जाती हैं। वह लगातार अपने गणित के अध्यापक के हाथों डांट खाता रहता है […]

लघुकथा

घर एक मंदिर है

घर एक मंदिर है टि्रन-टि्रन….. फोन की घंटी बजती है। ‘हैलो…अरे! बहुत देर से फोन कर रही थी। कहां थी? कैसी है? काफी दिनों से फोन नहीं आया? क्या कारण है?” सीमा लगातार बोलती जा रही थी.. “झाड़ू लगा रही थी।” रीमा ठंडी सांस भरते हुए… “बाई नहीं लगाई? भ‌ई देखो! हमने तो लगा ली […]

कहानी

पवित्र रिश्ता

ट्रेन को भी आज ही लेट होना था। स्टेशन की भीड़ देखकर उसका मन और भी उचाट हो कर रहा था।वह जल्दी से जल्दी इस शहर से दूर हो जाना चाहती थीं।भारी भीड़ में भी वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।चारों ओर उसे लोग […]

कहानी

फेसबुक

फेसबुक चलाने में मुझें इतना मजा नहीं आता था। पर रोज फेसबुक पर कोई ना कोई रिक्वेस्ट आ जाती थी।मुझें बड़ा अजीब लगता था,अनजान लोगों से जुड़ना।कभी-कभी मन में आता था कि डिलीट कर दूँ फेसबुक को।पर आजकल फेसबुक पर एक्टिवेट ना होना भी—-। सहकर्मी पूछ ही लेते थे,सर आप भी फेसबुक पर हो क्या? […]

आत्मकथा आत्मकथाएं कथा साहित्य बोधकथा भाषा-साहित्य लघुकथा संस्मरण

शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना |

शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना | सपना का लड़का अयांश अब एक साल का हो गया था| उसके जन्मदिन का न्योता हमे भी मिला था| मैं और मेरी बेहन साक्षी हम दोनों अयांश के लिए कुछ तोहफा लेने दुकान गए थे| अब एक साल के बच्चे के लिए खिलौनें से […]

लघुकथा

आग

”क्या आपने कभी हरा सोना देखा है?” एक आवाज आई. ”कौन है भाई, दिखाई तो नहीं दे रहे, पर बात तो बुद्धिमानी की कर रहे हो!” ”ठीक पहचाना ताऊ, मुझे “बुद्धिमानों की लकड़ी” भी तो कहते हैं न!” ”पहेलियां मती ना बुझाओ, अपना परिचय दो और आज किसलिए आए हो, यह भी बताओ.” ”ताऊ, आज […]

कहानी

पितृवंचिता

अजीत शर्मा , सुबह सुबह उठे।  पत्नी शिखा ने गरम गरम प्याली चाय की पकड़ाई।  साथ ही उसने सासु माँ को भी कांसे के गिलास में ऊपर तक भरकर चाय दी।  चाय क्या थी ,दूध और इलायची सौंफ आदि का काढ़ा।  सासु माँ इसमें ऊपर से एक चम्मच असली घी डलवाती थीं मगर अब डॉक्टरों […]

संस्मरण

बेबस्सी

                  सोमवार 21 स्तंबर का दिन, धूप और अपने हरिआली भरे गार्डन में बैठ कर मज़ा करना, इंग्लैंड में कभी कभी ही ऐसा दिन नसीब होता है। मौसम विभाग की जानकारी के मुताबक 21 और 22 स्तंबर को दिन बहुत अच्छा बताया गया था और आज 25 […]