Category : कथा साहित्य

  • प्रगति

    प्रगति

    सचिन की कार जाम मे फंसी थी। वह एक पांच सितारा होटल में कुछ लोगों से मिलने जा रहा था। यदि डील हो गई तो उसे अपना माल बाहर भेजने का मौका मिलेगा। वह एक उद्योग...

  • “सुनो सुनयना मेरी बात”

    “सुनो सुनयना मेरी बात”

    सुनो सुनयना मेरी बात, जिसकी गोंद में हम सभी पले-बढ़े, उछले-कूदे, नाचे-गाए और खेले-खिलाए। उसकी सुंदरता की सरिता में भीगे- नहाए, छाँव में बैठे तो धूप में कुम्हिलाए। बरसात की बौछार छलकाए तो ठंड में ठिठुरे...

  • पागल औरत !

    पागल औरत !

    गांव के नुक्कड़ पर बैठी औरत जिसके बाल खुले हुए और कपड़े अस्त-व्यस्त है। उसकी ये दुर्दशा देखकर लगता है कई दिनों से वह भूखी है। उसके चेहरे पर गम की लकीरें स्पष्ट नजर आ रही...


  • गुरदई

    गुरदई

    गुरदई, सारे मुहल्ले की रौनक होती थी। उस की उम्र कितनी होगी, किसी को कभी ख्याल ही नहीं आया। उमर पूछ कर करना भी किया था, उस के मुंह और कलाइओं से ढुलकता हुआ मांस ही...

  • लघुकथा- आत्मग्लानि

    लघुकथा- आत्मग्लानि

    “चप्पल घिस गयी बेटा, एक लेते आना | मैं थक गया हूँ, अब सोऊंगा |” “पापा! दो साल से प्रमोशन रुका पड़ा है | दे दीजिये न बाबू को हजार रूपये | आपकी फ़ाइल आगे बढ़ा देगा | बिना दाम के, कहीं काम होते...

  • नजरिया

    नजरिया

    भाई से ऐसी कतई उम्मीद न थी। हम सबकी मर्जी के खिलाफ उस गैर जाति की लड़की से शादी कर ली। कमाऊ लड़का देख कर फँसा लिया और ऊपर से न कोई दहेज। मम्मी-पापा उसे कभी...

  • प्राणी रक्षक

    प्राणी रक्षक

    बड़ी मुश्किल से जान बचा कर फटेहाल कपड़ों में मदारी माधो जैसे-तैसे घर पहुँचा था। उसकी हालत देख कर उसका बेटा बसंत घबरा कर बोला – “बाबा क्या हुआ ?” माधो काफी देर तक चुप रहा,...

  • शिक्षा

    शिक्षा

    लक्ष्मण बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि का था और बारहवीं कक्षा में पूरे जिले में प्रथम आया था । गाँव के मास्टर जी ने उसके माँ बाप से कहा -“बच्चा बहुत ही होनहार है । इसे...

  • आॅफिसर

    आॅफिसर

    विशाल समाहरणालय भवन की सीढियों पर एक किनारे पिछले कई घंटों से मैली-कुचैली अवस्था में राहुल के इन्तजार में बैठी बुढ़िया लगभग थक ही चुकी थी। प्रतीत होता था, मानो आधी नींद में ही वह अपनी...