लघुकथा

गरम चाय

सुजाता,अपने पति से शिकायत कर रही थी।जी,मैं घर पड़े-पड़े बोर हो गई हूँ,क्या करूँ?क्या हुआ?तुम क्यों बोर रही हो?तुम्हारे पास मनोरंजन के सारे साधन है।मोबाइल,टी. वी,लैपटॉप।फेसबुक चलाओ,कुछ फ्रेंड्स बना लो,फेसबुक पर चैटिंग करो,बोरियत दूर हो जाएगी। नहीं-नहीं, सुनील फेसबुक सुरक्षित नहीं है।आए दिन फेसबुक की दोस्ती की,बुरी खबरे सुनने को मिल जाती।टी. वी देखकर मैं […]

लघुकथा

राहत

”बड़ा मुश्किल हो गया है इस तरह घुट-घुटकर जीना! आदत जो नहीं रही! घर-ही-घर में बंद! न कहीं आना न जाना! चेहरे पर मुस्कान के बदले मास्क! लिफ्ट में मिलो तो मुंह फेरकर खड़े हो जाओ! यह भी कोई जीना हुआ!” कोरोना और लॉकडाउन से व्यथित अंकित अपने आप से बात कर रहा था. ”मन […]

लघुकथा

ठण्डी आह

मम्मी हमें गरीबों की मदद करनी चाहिए।हाँ बेटा,जरूर करनी चाहिए।वे भी हमारे समाज का अभिन्न अंग है।मम्मी आप सच कह रही हो।हाँ बेटा,मेरा विश्वास करों।मेरा मन तो किसी भी गरीब को देखकर द्रवित हो उठता है।मेरा बस चले तो मैं हर गरीब की मदद करूँ।पति,श्याम।माँ बेटी की बात बड़े ध्यान से सुन रहा था।पर व्यस्त […]

लघुकथा

तस्वीर

”मैं उपयोगी बम हूं, मुझे अपना बना लो, बंजर मिट्टी में प्यार के फूल खिला दूंगा.” चौंकाने वाली यह आवाज सुनकर प्रिया ने इधर-उधर देखा, कोई दिखाई नहीं दिया. ”शायद आपको विश्वास नहीं हुआ. होगा भी कैसे! बम का नाम लेते ही हिरोशिमा पर गिरकर तबाही मचाने वाले परमाणु बम ‘लिटिल बॉय’ की याद आती […]

लघुकथा

परीक्षा महागुरु

525वीं सरकारी स्तर की परीक्षाएं दे दी। आर एच आर यूके के अनुसार, यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है । अबतक इतनी परीक्षाएं संसारभर में कोई नहीं दिए हैं! मैं लगातार 31 वर्षों से प्रतिवर्ष कोई न कोई सरकारी स्तर की परीक्षा देते आ रहा हूँ । परिणाम भी सुखद हो, ऐसी अपेक्षा है! मैंने सोचा कि […]

लघुकथा

मेरे जीवनसाथी – तुम हो तो में हूँ!!

तुम्हें प्रिय नहीं लिखूँगी क्युंकी तुम तो सबसे प्रिय हो मुझे!!! जीवनसाथी आनंद(आनी), हैपी बर्थडे,तुम जीयो हज़ारों साल,साल के दिन हो पचास हज़ार,तुम्हें मेरी भी उमर लग जाए!!हमारे विवाह को 10 साल हो चुकें हें और हमें मिले हुए 15 साल…वक्त तेज़ी से निकलता चला गया पर हमारा प्यार बदता चला गया!तुम बोहोत सहनशील, मुझे […]

कहानी

सामजस्य

सीमा,तुम क्या चाहती हो?साफ-साफ कह क्यों नहीं देती?कम से कम हम दोनों चैन से रह तो सकते हैं।कब तक सहन करूँगा तुम्हारी चिक-चिक? हाँ-हाँ, अब तो तुम्हें मेरी हर बात चिक-चिक ही लगेगी।नई सहेली जो मिल गई है, वहीं तुम्हारे लिए सब कुछ हो गई।जब देखों उसी के नाम की रट लगाए रहते हो।गीता ऐसी […]

लघुकथा

जड़ें

”यदि सपने सच नहीं हों, तो रास्ते बदलो सिद्धांत नहीं, क्योंकि पेड़ हमेशा पत्तियां बदलते हैं, जड़ें नहीं.” सुशीला मिस्त्री ने भी देश बदला है, जड़ें नहीं. ”कहीं भी जाओ, अपनी जड़ें कभी मत बदलना.” सिडनी आते हुए बचपन में बड़े-बुजुर्गों द्वारा कही गई यह बात 90 वर्ष की सुशीला को अभी भी याद है. […]

लघुकथा

नया फूल

चेतन,बगीचे में खिले फूलों को देखकर खुशी से चहक उठा।फूलों की सुगन्ध, कोमलता उसके मन में अनगिनत सपने पैदा कर रही थी।एक-एक फूल उसे कोमल बच्चे की तरह लग रहा था।लाल,पीले और सफेद रंग के फूल।वह मन ही मन प्रकृति की इस अदभुत आभा पर मुग्ध हो रहा था। उसे एकाएक दीपा की याद आ […]

लघुकथा

मेरी आई

आज वह विदेश से लौट रहा था।पुष्पा बार-बार अपने धुँधले पड़े चश्में की धूल साफ कर रही थी।वह उम्र के आखिरी पड़ाव पर थी।शुभम के आने की खबर ने उसका मन प्रफुल्लित कर दिया था।पर अगले ही पल उसका मन उदास हो गया।पता नहीं,अब शुभम को अपनी आई याद भी होगी या नहीं।वह सिर्फ उसकी […]