लघुकथा

लघुकथा – सवाल

“तुम कोई न कोई सवाल पूछते रहते हो, आज ऐसा करो किसी और को सवाल पूछने दो। तुम्हारे अलावा भी पूछने वाले हैं।” नेता जी राजेश को टोकते हुए कहा। “ठीक है ।आप सवालों से भाग रहे हैं।ये अच्छी बात नहीं है मैं भी जिद्दी हूं ज़बाब जान कर रहूंगा।” “तुम बैठ जाओ । मैं कुछ […]

उपन्यास अंश

लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 16)

इस प्रकार कणिक ने महाराज धृतराष्ट्र को राजनीति की मुख्य बातें समझायीं और शत्रुओं को वश में करने के उपाय बताये। परन्तु यह सब तो धृतराष्ट्र पहले से ही जानते थे। उनको इससे संतुष्टि नहीं हुई, क्योंकि जिस उद्देश्य से उन्होंने कणिक को परामर्श हेतु बुलाया था, वह उद्देश्य पूरा होता नहीं लग रहा था। […]

कहानी

बिम्ब प्रतिबिम्ब (भाग 7 अंतिम)

चार दिनों बाद, दर्शन और हरमीत को भारत लौट आना था. इस बीच, वे पत्रकारों और मीडिया के कैमरों से बचने के लिए ग्लासगो चले गए, जहां हरमीत के कुछ रिश्तेदार रहते थे. ग्लासगो पंहुचते ही दर्शन को पेट में बायीं तरफ दर्द होना आरम्भ हुआ. हरमीत ने उसे एक परिचित डॉक्टर को दिखाया. सामान्यतया […]

उपन्यास अंश

लघु उपन्यास – षड्यंत्र (कड़ी 15)

शकुनि की बातें सुनकर धृतराष्ट्र की चिन्ता और अधिक बढ़ गयी। पांडवों के प्रति उनके मन में द्वेष तो पहले से ही था, लेकिन अब इस संभावना को सोचकर उनकी चिन्ता चरम पर पहुँच गयी कि उनको राजसिंहासन छोड़ना पड़ेगा और उनके पुत्रों को पांडवों की दया पर रहना पड़ेगा। इस संभावना के कारण उनको […]

संस्मरण

अठन्नी ईमानदारी

कटिहार शहीद चौक के पास एक होटल के बाहरी हिस्से के भूतल पर नितांत छोटा-सा किताब दुकान, किन्तु वहाँ जो भी पत्र-पत्रिकाएं और उपन्यासादि आपको चाहिए, वो निश्चितश: मिल जाएंगे ! इस दुकान पर बैठे हैं बतौर पुस्तक-विक्रेता यानी पान चबाते ललन भैया । वे कटिहार के पत्रकार बन्धुओं के अघोषित रिपोर्टर भी जरूर थे […]

लघुकथा

लघुकथा – गृह-शान्ति का अचूक मंत्र

यूँ तो मीठालाल का परिवार कस्बे में अपनी अच्छाइयों के कारण जाना जाता है । स्वयं मीठा लाल धर्मप्राण व पुराने विचारों पर चलने वाला इंसान है । पर अचानक पिछले कुछ वर्षों से परिवार में अशांति रहने लगी थी । पिता-पुत्र, पति-पत्नी के बीच कलह रहने लगा । समझदारी के सबकुछ प्रयत्न करने पर […]

लघुकथा

श्राद्ध की परिभाषा 

“बेटा चलो जल्दी नहा धोकर तैयार हो जाओ पंडित जी आने वाले होंगे आज दादा जी के श्राद्ध है ना”  अमित ने अपनी 7 वर्षीय बेटी श्रुति को  बोला , पूरा परिवार नहा धोकर तैयारी में लग गया, अमित पंडित जी के द्वारा बताई गई सामग्री के साथ तर्पण की व्यवस्था करने में जुट गया […]

कहानी

रैगिंग से हमसफर तक

कॉलेज का पहला दिन था… कॉलेज के गेट पर पहुंचते ही दिल अन्दर से धक-धक कर रहा था, मानो दिल बाहर ही आ जाएगा, यूनिवर्सिटी मे चारों तरफ लड़के अपनी गाड़ियों से आ …जा रहे थे। धीरे-धीरे कालेज के अन्दर की तरफ हम लोगों ने कदम बढाया, तभी एक लड़के को देखकर अनामिका ने धीरे […]

लघुकथा

जिम्मेदारी

जब से नई बहू घर में आई थी, गाहेबगाहे अलमारी से पैसे गायब होने लगे थे। रमा को अपनी नई बहू पर शक तो था लेकिन बिना सबूत के वह उसपर आक्षेप भी कैसे लगाती ?  वह चाहकर भी अपनी बहू से कुछ कह नहीं पा रही थी।  महीने के आखिर में उसे घर का […]

लघुकथा

पितृ पक्ष

“क्या दादी! जब देखो पुरातन जमाने की रीति-रिवाजों में व्यस्त रहती हैं! मम्मी को भी उलझा रखा है।” “क्यों इतना चिढ़ा हुआ है? पितृ पक्ष चल रहा है, जानता है न?” दादी ने मुस्कुराते हुए अनसुना किया। “आजकल आपको और मम्मी को गंदी-शंदी चीजें खाने वाले काले कौवे बड़े पसंद आ रहे हैं! जो कहीं […]