कहानी

कहानी – टुलु की प्रेमकथा 

यह प्रेम कथा है..असम के आदिवासी परिवार में जन्मी एक सोलह वर्षीय लड़की टुलुमुनि की।  जिसको प्यार सब टुलु कहते थे। एक सीधा साधा आदिवासी असमिया परिवार कोकराझार के एक छोटे से गांव में रहता था। चार बच्चों सहित छह लोगों का यह परिवार दिहाड़ी मजदूरी करता था। टुलु इस परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी। बंडल […]

लघुकथा

रिहाई 

अपने पति की नियुक्ति वाले शहर से ससुराल पहुँची मीरा जब रात में सोने का प्रयास कर रही थी तब कानों में किसी के सिसकने का स्वर पहुँचने लगा। स्वर का पीछा करते पहुँची तो वह अम्मा जी की घरेलू नौकरानी के सोने की जगह थी। पूछा, “क्या हुआ?” तो उस 13-14 साल की बच्ची […]

कहानी

हम होंगे कामयाब

सम्बंध विच्छेद के मुकदमे की पहली तारीख़ थी । बहुत दिनों बाद चार्वी संचित को देख रही थी । संचित उसके जीवन का आदर्श पुरूष हुआ करता था । आज से पाँच वर्ष पूर्व ही तो मिले थे दोनों दफ़्तर की कैंटीन में । चार्वी सुबह देर से उठी थी , खाना बनाने का समय […]

लघुकथा

जबाब

बहुत दिनों बाद आज अपनी एक बचपन की सखी के घर जाना हुआ।वो कुछ दिन पहले ही नए घर में शिफ्ट हुई थी और मुझे बार बार शिकायत कर रही थी कि तू मेरा घर देखने नहीं आई। बहुत दिनों बाद प्रोग्राम बनाते बनाते आखिर आज मैं पहुंच ही गयी उसके घर। घर तो उसका […]

संस्मरण

वो दोस्त जो गुम है अब कहीं

ज्यादा पुरानी बात नहीं है,स्कूल के शुरूआती दिनों में ही उससे मुलाकात हो गई थी। उसकी आंखों में एक तेज़ था। मानों कि दुनियां जीत ले अपने शौर्य से,पर वो नादान तो अपनी मुस्कान से सबको अपना मुरीद बनाना चाहती थीं। कुछ उसे सिरफिरा कहते थे तो कोई खुदगर्ज। वो तो अपनी धुन पर सवार […]

लघुकथा

मन की शांति

एक राजा था जिसे पेटिंग्स से बहुत प्यार था। एक बार उसने घोषणा की कि जो कोई भी उसे एक ऐसी पेंटिंग बना कर देगा जो शांति को दर्शाती हो तो वह उसे मुंह माँगा इनाम देगा। फैसले के दिन एक से बढ़ कर एक चित्रकार इनाम जीतने की लालच में अपनी-अपनी पेंटिंग्स लेकर राजा […]

लघुकथा

कोरोना

“अरे रमेश ! वो अपने कालू अंकल नहीं दिखे पिछले कई दिनों से ? तुझे कुछ पता है ?” “कौन कालू अंकल ?” ” अरे वही …जो हरदम शेखी बघारते रहते हैं। मास्क लगानेवालों पर अक्सर हँसा करते हैं। अभी उस दिन तेरे सामने ही तो बोल रहे थे ‘ कोरोना वोरोना कुछ नहीं ,सब […]

लघुकथा

कोरोना

“अरे रमेश ! वो अपने कालू अंकल नहीं दिखे पिछले कई दिनों से ? तुझे कुछ पता है ?”  “कौन कालू अंकल ?” ” अरे वही …जो हरदम शेखी बघारते रहते हैं। मास्क लगानेवालों पर अक्सर हँसा करते हैं। अभी उस दिन तेरे सामने ही तो बोल रहे थे ‘ कोरोना वोरोना कुछ नहीं ,सब […]

लघुकथा

कर्ज

कैलाश ने एक व्यक्ति से कई वर्ष पूर्व दिए हुए उधार के रुपए वापिस करने के लिए अनुरोध किया। उसका उत्तर था ===== मैं तो आपको पितृतुल्य मानता हूं। और कोई भी संतान कितनी भी अच्छी हो माता पिता का कर्ज इस जन्म में तो कभी भी कोई भी नहीं चुका सकती है। फिर मैं […]

लघुकथा

प्रतिभा की जीत

लोग बताते हैं कि जब निशा पैदा हुई थी, तब परिवार का कोई भी सदस्य खुश नहीं हुआ। शायद लड़के की चाहत पूरी नहीं होने के कारण लोग निराश थे। निशा जब पांच साल की हुई तब उसका नन्हा सा प्यारा भाई पैदा हुआ। घर में सभी बहुत खुश थे। चंद दिनों बाद ही निशा […]