Category : कथा साहित्य

  • झूठी शान

    झूठी शान

    झूठी शान ( कहानी ) ” क्या कह रहे हो ? ……कैसे ? ………. ये कब हुआ ? ” फोन पर बात करते हुए अशोक बाबू अचानक उत्तेजित हो उठे थे । फोन पर दूसरी तरफ...

  • राम का मंदिर

    राम का मंदिर

    अयोध्या नगरी के पास फैजाबाद में एक गरीब परिवार रहता था । दशरथ प्रसाद दिहाड़ी मजदूर था । वह एक छोटी से झोंपड़ी में अपने इकलौते पुत्र बजरंग और पत्नी के साथ रहता था । जो...

  • झांसा

    झांसा

    ”धरती मां, आज तुम महाविनाश के कगार पर कैसे पहुंच गई हो? तुम तो सर्व समर्थ थीं. रत्नगर्भा, सुजलां, सुफलां, शस्य श्यामलां… आज इतनी बेबस क्यों?” ”मैं भी तुम जैसी मूक और सहनशील जो हो गई...

  • लघुकथा – प्रसव पीड़ा!

    लघुकथा – प्रसव पीड़ा!

    निशांत को सहसा उस दिन की याद आ गई, जब सीमा को प्रसव के लिए वह अस्पताल लाया था. सीमा प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, छटपटा रही थी.“स्थिति नाज़ुक है, बच्चा ऑपरेशन से ही होगा।”...

  • लघुकथा – समन्वय

    लघुकथा – समन्वय

    रोज की तरह आज भी सैर के समय वह व्यक्ति मिला. यहां कोई ”नमस्ते” या ”राम-राम” समझने वाला तो है नहीं, सो अपनी आदत के मुताबिक मैंने उसे ”गुड मॉर्निंग” कहा. पर यह क्या! मुझे खुद...

  • लघुकथा – सुखी परिवार

    लघुकथा – सुखी परिवार

    एक घर में चार बेटे बहुएँ ,उनकेबच्चे सभी चारों अपने अपने घर के कोनों में रहते थे| घरके बड़े मुखिया राम लाल जी सबके पिता मध्य में अबकी देख –रेख में जीवन बीता रहे थे| घर...


  • “संस्कार”

    “संस्कार”

    हरीश लाला के बड़े बेटे गिरीश की शादी के लिए लड़की रीमा और रीमा के माता-पिता आये.. चाय नाश्ते के बाद बात शुरू हुई…“मुझसे शादी कर लें!” रीमा ने गिरीश से कहा।“मेरी शक्ल पर बुद्धू या...

  • पिता जी।

    पिता जी।

    सुमन ने जैसा ही दरवाजा खोला, पिताजी ने प्यार से सिर पर हाथ फेरा। सुमन की ताक़त यही थी, पिताजी का विश्ववास और साथ। सुमन की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी,  अब रोज़ कहीं न कहीं...

  • अंजू – भाग ६

    अंजू – भाग ६

    धर्मेंद्र रोज सुबह तैयार होकर दुकान जाता। दिन भर मन लगाकर काम करता और रात को लौटकर खाना खाकर अपने कमरे में चला जाता। स्वयं को उसने पूरी तरह काम में झोंक दिया था। मम्मी से,...