Category : कथा साहित्य

  • सुरक्षा का प्रश्न

    सुरक्षा का प्रश्न

    सुबह से घर में बवाल मचा हुआ था। माँ के सन्दूक से सारे गहने किसी ने निकाल लिए थे। घर में बेटा बहू, बेटी और माँ चार ही प्राणी थे तो जाहिर है कि यह काम...


  • सरसराहट

    सरसराहट

    ”मेरी आहट सुन पा रहे हो क्या?” एक आवाज आई. ”तुम कौन हो?” ”मैं हूं कल की आहट.” ”कौन सा कल? बीता कल या आने वाला कल?” सोमेश ने पूछा. ”जो भी तुम समझो.” ”ऐसा है...

  • कल की आहट

    कल की आहट

    अनिता चैन की लंबी  सांस ली, सपने में भी उसने  नहीं सोचा था कि जिस बात पर आए दिन दिवाकर से बहस होती  रहती है उसका समाधान यूँ  निकलेगा।         उच्च अधिकारी पति...


  • सच्ची आधुनिकता

    सच्ची आधुनिकता

    सच्ची आधुनिकता सुबह- सुबह सोसाइटी के पार्क में मॉर्निंग वॉक करते हुए मिसेज शर्मा की नजर मिसेज बैनर्जी पर पड़ी। “हेलो मिसेज बनर्जी क्या बात है आप आजकल सोसाइटी की किटीज में नहीं दिख रहीं!” “ऐसे...


  • विडम्बना

    विडम्बना

    विडम्बना वही तो है, बिल्कुल वही। आज पाँच वर्षों के बाद उसे देखा मैंने हरिद्वार में पतितपावनी गंगा के किनारे। गेरुआ वस्त्र में लिपटी हुई, मुख पर असीम शांति लिए हुए चोटिल और बीमार पशुओं की...

  • एनकाउंटर

    एनकाउंटर

    एनकाउंटर क्या हाल है शेखू लंगड़े? अरे ! इंस्पेक्टर दिग्विजय आप। हाँ शेखू! इंस्पेक्टर साहब! शेखू तो जेल में ही मर गया था। अब तो आपके सामने शेखर रावत है साहब। हा हा हा…अच्छी बात है...

  • फुलझड़ी

    फुलझड़ी

    हलो बुआ! प्रणाम! हैप्पी दिवाली! जी बुआ, पापा मेरे हिस्से की दिवाली मनाने के लिए फुलझड़ी लाए। स्कूल में सुने पर्यावरण की हानि वाला उपदेश उन्हें बतलाया, तो कहने लगे कि नीति बेटी, फुलझड़ी से ध्वनि...