गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यादों का इक बहुत पुराना कमरा टोल रहा हू़ँ। सूखे ज़ख्मों के मैं फिर से टाँके खोल रहा हूँ। शायद सजदे की मुद्रा में एक समन्दर आए, उमीदों के अंधेरे में उजाले घोल रहा हूँ। हर आँख में आंसू टपके, पलकों की सरहद् पर, महफिल की ख़ामोशी भीतर कविता बोल रहा हूँ। घी जब खत्म […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़जल

जा, बे, जो करना था कर के देख लिया। तेरा एक समन्दर तर के देख लिया। चाँद सितारे दुश्मन बन कर ही निकले, मुट्ठी भीतर सूरज धर के देख लिया, सुन्दरता के भीतर कितनी कायरता, जहर फनियर साँप् का जर के देख लिया। फिर भी एक संतुष्टि की है भाल अभी, मर के, जी के, […]

गीतिका/ग़ज़ल

नदियों के जाल में

इस नदी पर, कभी पुल बनाना नहीं, क्यों कि उसपार, ऐसा ठिकाना नही । मेरे हृदय को ही, वो बेचकर खा गए- फिर भी उनको, हमने पहचाना नहीं । अब संस्कारों की बातें सब झूंठी लगें- बच्चे कहते हैं, अब वह जमाना नहीं । नदियों के जाल में, ये जो सागर फँसा- हमने समझाया बहुत, […]

गीतिका/ग़ज़ल

कुछ कहूँगा नहीं

कैसे सोचूँ मैं, सबकी, बताओ मुझे- कोई, इंसान एक, ढूंढ लाओ मुझे । जिसके अन्दर, समन्दर भावों का हो ऐसे हृदय से, परिचित कराओ मुझे । अमावस के दलदल में, मैं  हूँ फँसा सोचना क्या है, तुम छोड़ जाओ मुझे । मैं मौन हूँ वृक्ष सा, कुछ कहूँगा नहीं काटो भी, जल चढ़ाकर चिढाओ मुझे […]

गीतिका/ग़ज़ल

गलियों में भेड़िये

अब तो गलियों में आकर ही रहने लगे हैं- ये भेड़िये, आदमी खुद को कहने लगे हैं । कल अहंकार में थे, जो पर्वत से ऊँचे- अब, पहाड़ों की भाँति ही, ढहने लगे हैं । फल, मिलने लगा है, जो वो बो रहे थे- प्रभु को याद कर हम सितम सहने लगे हैं । अपने […]

गीतिका/ग़ज़ल

किसे पता

मंजिल अभी और दूर कितनी, किसे पता है मिलेंगें राह में कांटें या कलियां, किसे पता है फर्ज मुसाफिर का सिर्फ चलते चले जाना मिले किसे मोड, हमसफर, किसे पता है दिये जला दिये राह में, भूले भटकों के लिये कितनी उम्र मगर चिराग की, किसे पता है कसूर किस्मतों का या कमीं कोशिशों में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपने हिस्से का नया सूरज उगाने के लिए हौसला भी चाहिए कुछ कर दिखाने के लिए क्या छिपाने के लिए है क्या बताने के लिए एक चिंगारी है काफी घर जलाने के लिए करके वादा तोड़ देना है बहुत आसान पर चाहिए हिम्मत बहुत वादा निभाने के लिए .. ज़िंदगी में कब तलक भटकेगा राही […]

गीतिका/ग़ज़ल

यादों का गुबार

तू न आया मौसमेँ गुल फिर से आ गया यादों का नशा फिर से मेरे दिल पे छा गया कलियों ने भी शरमा के जो घूँघट को उठाया भंवरा भी आके कानों में कुछ गुनगुना गया अंबर पे घटाएं भी फिर झूम के आई हैं बरसी कुछ इस तरह से वो याद आ गया ऐ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिससे दिल ही न मिले उससे बात क्या करना जब पता हो जवाब तो सवालात क्या करना। जिससे मिलने के बाद दिल का चैन खो जाये उससे बचकर ही रहो मुलाकात क्या करना। वक्त जाया न करो, वक्त कीमती है बहुत काम से काम रखो यार बात क्या करना। घोर जंगल है यहां जान का […]

गीतिका/ग़ज़ल

दर्द का तोहफा मिला

दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच में हम जी रहे थे भूल से बँट गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमान अब खुदा बँटने लगा है इस तरह की तूल से सेक्स की रंगीनियों के आज के इस दौर में स्वार्थ की तालीम अब मिलने लगी स्कूल से […]