गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

झूठों का सरदार दिखाई देता है। सोया पहरेदार दिखाई देता है। कोठी, बँगला, कारें, नौकर, चाकर हैं ऊँचा कारोबार दिखाई देता है। बातें करता जैसे संत – महात्मा हो कर देगा उद्धार दिखाई देता है। नीयत उसकी साफ नहीं हो सकती है हाथों में हथियार दिखाई देता है। जो बोलेगा, वह सारा छ्प जाएगा साथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सोंचते क्या हो बढ़ के वार करो , दिल की नफरत का तुम शिकार करो । सोंचना अपना औ पराया क्या , प्रेम  है तो सभी से प्यार करो । ऐब दूजे के देखना फिर तुम, पहले अपने मे तो सुधार करो ।। पहले कीमत तो आंक लो उसकी, फिर खुशी से ये जाँ निसार […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

जो आँखें ढूँढती हैं वो नज़ारा क्यों नहीं मिलता अगर मैं हूँ समंदर तो किनारा क्यों नहीं मिलता ============================== मेरे चारों तरफ यूँ तो बहुत से लोग रहते हैं दिल जिससे मिला उससे सितारा क्यों नहीं मिलता ============================== मुख्तसर सी मुलाकातें तो होती हैं कई उससे मुझे हमदम मेरा सारे का सारा क्यों नहीं मिलता […]

गीतिका/ग़ज़ल

गुलाब और कांटे

जहां गुलाब, वहां कांटे होते ही हैं, गुलाब कांटों से डरते नहीं हैं, कांटे ही तो उनके रक्षक हैं, वीरव्रती मुसीबतों से डरते नहीं हैं. गुलाब की तरह कांटों में रहकर भी, खिल-खिल खिल-खिल खिलते रहिए, कांटे संभलकर चलने का सबब बनेंगे, आप तो बस साहस जुटाकर चलते चलिए. कांटे भी फूलों की सेज बन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी ज़ुल्फ में पेचोख़म है। और खूब बात में दम है। क्यों और सताती हो अब, पहले दु:ख दिल में कम है? दूर रहो इससे तुम, शायद थैले में बम है। आ जाए लड़ ले मुझसे, जिसके बाज़ू में दम है। है आज कोई दिल ऐसा, कोई न जिसमें ग़म है? हैं सब घमन्ड के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जीवन में कुछ करना सीखो रोना सीखो हँसना सीखो चारों तरफ खुशियाँ बिखरी हैं खुशियों के संग रहना सीखो टुकड़े टुकड़े गम हैं आते जहर गमों का चखना सीखो जख्म हैं गहरे इंसानो के दर्द सभी का हरना सीखो पड़े जरुरत जब सीमा पर देश के खातिर मरना सीखो उपर वाला सब देख रहा है […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

इश्क की आग में इक बार जल के देखते हैं, पहलू-ए-यार में हम भी मचल के देखते हैं, ============================= जिंदगी कट ना जाए इंतज़ार में ही कहीं, वो तो आएगा नहीं हम ही चल के देखते हैं, ============================= साफगोई ने तो सब छीन लिए दोस्त अपने, दुनिया के जैसे अब लहजा बदल के देखते हैं, […]

गीतिका/ग़ज़ल

इश्क़ निभाई जाए

एक टुकड़ा इश्क का गर मिल जाए ये जिंदगी अपनी जन्नत-सी हसीन हो जाए। इस दिल पे तुम्हारा इख्तियार हो जाए तेरे इश्क में ये रुह फना हो जाए। ग़म के काले घने बादलों के दरम्यान तेरे इश्क की बिजली कौंध -सी जाए। स्याह सर्द अंधेरी रातों में तेरे इश्क की शमा रौशन हो जाए। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – चिड़िया किधर गई

शाम सवेरे आती थी वह चिड़िया किधर गई। गीत खुशी के गाती थी वह चिड़िया किधर गई। गहरा अपनत्त्व बना कर शोखी नखरा नियंता, रिश्ते क्या? समझाती थी, वह चिड़िया किधर गई। ना जाने क्या रिश्ता था उनकी ममता भीतर, दूर रहे तड़पाती थी वह चिड़िया किधर गई। एक कटोरी पानी पी कर अभिवादन करती, […]

गीतिका/ग़ज़ल

फितरत

नशा करने की फितरत है मुझे इसलिए नशा करता हूं जानता हूं नशा नाश का कारण है कोशिश भी करता हूं पर नशा छोड़ते हुए डरता हूं यह नशा ही तो मुझे जिंदा रखे हुए है घर-समाज में मेरी चर्चा को आम बनाए रखे हुए है लोग कहते हैं नशा छोड़ दो जितना जल्दी हो […]