गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल .

  मेरा दिल अजव प्रेम दर्पण दिमाग सांचा बशीभूत अर्पण . नेक स्पर्श में हलचल स्पंदन बोझ जोश में भरा  रूखापन. हर्ष और गम सदा उलझाते सभी भावों अभिव्यक्ति बंदन. क्रोध में तन्दूर मन  मंथन रच शांत पाता धर्म निरंजन. दूध उफान सा उग्र पाता मिल दिल दिमाग संतुलन. लिखने लिए न जमीर सौदा “मैत्री”हासिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुद को तुम समझाकर तो देखो दर्द में भी मुस्कुराकर तो देखो जरूरतें हो जाएंगी कम तेरी भी ईमानदारी से कमाकर तो देखो बढ़ जाएगा एक और दुश्मन किसी को आईना दिखाकर तो देखो सीख जाओगे दलाली भी करना तुम पत्रकार बनकर तो देखो हो जाएगी मोहब्बत मिट्टी से कुल्हड़ में चाय पीकर तो देखो […]

गीतिका/ग़ज़ल

व्यंग्य ग़ज़ल-आज वो बदनाम कहता है

निकलता जिनसे कुछ मतलब उन्हें हुक्काम कहता है. निकल जाता है जब मतलब वो झंडू बाम कहता है. तरीका उसका अपना है किसी की चापलूसी का, पड़े जब काम कल्लू से तो कालाजाम कहता है. टहलने भी नहीं जाता न करता दंड-बैठक वो, सुबह बस फूँ-फाँ कर लेता उसे व्यायाम कहता है. पिलाकर जाम मुझको […]

गीतिका/ग़ज़ल

बवंडर उठ रहा है क्या तुम्हें इसकी ख़बर भी है

बवंडर उठ रहा है क्या तुम्हें इसकी ख़बर भी है तबाही से डरे हैं लोग घबराहट इधर भी है मेरी मंज़िल मुझे आवाज़ देती है चले आओ उधर है डूबता सूरज इधर धुँधली नज़र भी है समझने बूझने में साल कितने ही गँवा डाले समय है कम हमें मालूम है लंबा सफ़र भी है ज़रा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

किसी मासूम की हंसी में थोड़ा खिलकर देखिए या किसी मज़लूम के अश्कों में ढल कर देखिए छोड़ जाना हाथ में कातिल के खुशबू मरके भी सीखना हो तो किसी गुल को मसलकर देखिए ज़ख़्म अपने क्या दिखाएं आपको महफिल में हम हो कभी फुर्सत तो तन्हाई में मिलकर देखिए यूँ न हो पाएगा अंदाज़ा […]

गीतिका/ग़ज़ल

वो इस तरह मिला है…

आ कर गले वो इस तरह मिला है। जैसे बाक़ी अभी कोई गिला है।। ए दिल तय करनी होगी लम्बी दूरी। अभी तो पहला दरवाज़ा खुला है।। ख्वाबों को नींद में ही रहने दो। फ़क़त एक हाथ हाथ से मिला है।। इतनी जल्दी भला क्यों ऊब गए। चलेगा लम्बा, ये जो सिलसिला है।। तुमने कहा, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

दिल की गिरह में ….

दिल की गिरह में जो दबी सी थी। याद शायद वो आपकी सी थी।। कच्चे आँगन में यारियाँ पक्की। ज़िन्दगी वो ही ज़िन्दगी सी थी।। तेरे घर की वो राह पथरीली। पैर कहते हैं मखमली सी थी।। चाहे जुगनू या फिर शमा जैसी। जैसी भी थी वो रोशनी सी थी।। जाने दुनिया में कैसे फैल […]

गीतिका/ग़ज़ल

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं। लिखा किस्मत का टाले से टलता नहीं।। लग गया हो अगर इश्क का रोग तो, लाख कर लो दवा दिल बहलता नहीं। तार दिल के किसी से जुड़े हैं जरूर, वर्ना दिल यूँ अचानक धड़कता नहीं। दिल जला है किसी का करो अब पता, धुआं यूँ ही फिजाओं में […]

गीतिका/ग़ज़ल

गुंजन की ग़ज़ल

मुद्दत से चाहते थे वो हो गयी हमारी। समझो न इसको कोई बाज़ीगरी हमारी। वो कह रहे हैं हमसे मरते हैं तुम पे कब से उनको तो भा गयी है ये सादगी हमारी। गफ़लत में रात बीती गफ़लत में दिन ये गुज़रा। ग़फलत में जी रहे थे, ग़फलत ये थी हमारी सीरत ने उनको लूटा,सूरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

मजा ही कुछ और है

यादों के गुलिस्तां में मन भटकता चहुं ओर है, तुम्हें सोचने का जाने क्यों मजा ही कुछ और है। हकीकत में सब हासिल हो यह मुमकिन नहीं, ख्वाबों में हकीकत को सजाने का मजा कुछ और है। जमीन हो या हो आसमान नहीं मिलता सबको, क्षितिज में दोनों को पाने का मजा ही कुछ और […]