गीतिका/ग़ज़ल

वफ़ा ने मेरे

वफ़ा ने मेरे ———————————————— ख़फा ख़फा से हैं सब अपने बेगाने मेरे यही इनआम की है मुझको अदा ने मेरे इश्क उसने भी किया है वो मजे लेते हैं वो तो बरबाद किया मुझको वफ़ा ने मेरे दिया रकीब को कुछ ऐसे तआऱुफ मेरा शहर में दो चार ही हैं ऐसे दिवाने मेरे ख़त उनके […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क में तेरे कुछ ऐसे मर मिटा हूँ मैं तू ही तू है मुझमें अब कहाँ बचा हूँ मैं ======================== ऊगेंगे देख लेना कुछ दरख्त पानियों के तेरी गली में अश्क थोड़े बो चला हूँ मैं ======================== तमन्ना तुझसे मिलने की दिल में लिए हुए आग में तन्हाई की बरसों जला हूँ मैं ======================== दीवाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी बैठकर कभी लेटकर चल कर रोये बाबू जी, घर की छत पर बैठ अकेले जमकर रोये बाबू जी। अपनों का व्यवहार बुढ़ापे में गैरों सा लगता है, इसी बात को मन ही मन में कह कर रोये बाबू जी। बहुत दिनों के बाद शहर से जब बेटा घर को आया, उसे देख कर खुश […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चलना हल्की चाल मुसाफिर। मत होना बे हाल मुसाफिर। संकट है विकराल मुसाफिर। काम नहीं अब टाल मुसाफिर। दुख तेरा क्या समझेगा वो, जिसकी मोटी खाल मुसाफिर। एक क़दम तक भारी उसको, इतना है बेहाल मुसाफिर। जिस पर तेरा आज बसेरा, काट नहीं वो डाल मुसाफिर। ज़ुल्म ज़बर के जो मारे हैं, बन जा उनकी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ज़ख्म हरा रहता है

अश्कों की कोई खता नहीं आंखों से जो बहता है, हो कोई भी मौसम लेकिन ज़ख्म हरा रहता है। एक तुम्हें चाहा तो फिर न चाहत हुई दोबारा, दिल की कोने कोने में अक्स तेरा ही रहता है। तड़प कर रह जाते हैं कुछ एहसास दिल के, भूली बिसरी यादों का कारवां कहां ठहरता है? […]

गीतिका/ग़ज़ल

बसंत आया है

डाल-डाल पर गुल खिले, बसंत आया है। पात-पात हँसकर कहे, बसंत आया है। चारु चंद्र की चाँदनी, विहार को उतरी। स्वर्ग लोक भू पर दिखे, बसंत आया है। सुर के साथ ठंडी हवा, फिज़ाओं में बिखरी। तार-तार मन का गुने, बसंत आया है। बाग-बीच कलिकाओं से, किलोल भँवरों की। फूल-फूल तितली उड़े, बसंत आया है। […]

गीतिका/ग़ज़ल

“फूल हैं पलाश में”

कितने हसीन फूल, खिले हैं पलाश में फिर भी भटक रहे हैं, चमन की तलाश में — पश्चिम की गर्म आँधियाँ, पूरब में आ गयी ग़ाफ़िल हुए हैं लोग, क्षणिक सुख-विलास में — जब मिल गया सुराज तो, किरदार मर गया शैतान सन्त सा सजा, उजले लिबास में — क़श्ती को डूबने से, बचायेगा कौन […]

गीतिका/ग़ज़ल

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है…

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है ग़रीबी क़द्र क्या दस्तार क्या सर छीन लेती है पदों पर बैठने वालों न देखो सिर्फ़ अपनो को ये ख़ुदगर्जी हुनरमंदों के अवसर छीन लेती है हुकूमत पूछती है प्रश्न जब प्रश्नों के उत्तर में रियाया के लबों से प्रश्न अक्सर छीन लेती है दिखाकर भाषणों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए..

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए अमीरे शहर से कह दो शराफ़त पर उतर आए दिया क्या साथ हमने मुफ़लिसों की हक़परस्ती का हमारे दोस्त ही हमसे अदावत पर उतर आए तुम्ही से थी हमें उम्मीद दोगे साथ हर हालत मगर ये क्या हुआ तुम भी शिकायत पर उतर आए तुम्हें माना रियाया […]

गीतिका/ग़ज़ल

गले मिल जाओ

गले मिल कर आओ एक वादा कर लें, सुकूं मिल जाए रूह को ये कोशिश कर लें। इंतजार की घड़ियां जरा लंबी हैं मगर, मिलकर गुजार लेंगे इसे, ये इरादा कर लें। वर्षों बीत गए यूं ही तनहा जीते जीते, पल पल के सूनेपन को आज हम भर लें। अब जो छाई है प्यार की […]