गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जुदा तुमसे नही हूं सुन तेरी परछाईं हूं मैं गुजरती है तुम्हें छू कर वही पुरवाई हूं मैं। तुम्हारे दिलकी डोली मे ये दुल्हन उतरती है तेरी धड़कन में बजती है वही शहनाई हूं मैं। छुपकर अकेले में जिसे तुम याद करते हो जिसे तुम तन्हा कहते हो तेरी तन्हाई हूं मैं। इश्क के बीज […]

गीतिका/ग़ज़ल

वक्त ये गुजर जाएगा

ये न समझो कि जीवन ठहर जाएगा वक्त मुश्किल है लेकिन गुजर जाएगा .. रौशनी हर तरफ होगी खुशियों भरी ये अँधेरा भी डर से सिहर जाएगा .. जिसने घोला जहर सारे संसार में शख़्स बचकर भला वो किधर जाएगा .. गाँव गलियाँ सड़क सब ही वीरान हैं क्या पता कब करोना का डर जाएगा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

जब गलियो में सन्नाटा है तब दोष क्या है मीनारो का कश्ती को डुबाया मांझी ने तब दोष क्या है पतवारो का जब चमन उजाड़े माली ही तब दोष क्या है गुलजारो का जब बीच दिलो के दीवारे तो दोष क्या है दीवारो का जंगल कम, बाघ शहर में हैं तो दोष क्या है खूंखारो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : कोरोना का क़हर

ये कोरोना का क़हर, साज़िशों की बू आये हर तरफ़ मौत का डर, आँखों में आँसू आये घर को, घर के ही चराग़ों ने है जला डाला गाँव शमशान हुए, लाशों से बदबू आये सारी दुनियाँ हुई हलकान महामारी से रंग इसका, न कोई रूप, न ख़ुश्बू आये हम रुकेंगे, न थकेंगे, ये जंग जीतेंगे […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

गर हूँ दर – बदर तो हुआ क्या है इश्क में जख्मों  के  सिवा क्या है बातो में ख्याबो में सांसो में वो है उसके सिवा  मुझमें  बचा क्या है अजीब बीमारी फैली है इश्क सी सभी पूछते है इसकी दवा क्या है प्रेमी , पागलो और शायरों के पास फाका मस्ती के सिवा मिला […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उसकी तरक्की तो गई टल जिसने सोचा करेंगे कल =================== मुश्किल से डरना कैसा कोशिश कर निकलेगा हल =================== दिल में जब रंजिश नहीं कोई फिर माथे पर क्यों हैं बल =================== लंबी-लंबी बातें छोड़ मेहनत कर पाएगा फल =================== कोई साथ नहीं देगा अपनी आग में आप ही जल =================== गम को ढाल के […]

गीतिका/ग़ज़ल

कोरोना बायरस आया ना होता

कोरोना बायरस भारत आया न होता तो लॉकडाउन देश मे लगाया न होता 21 दिनों हम अपने घरो मे नही रहते जो कोरोना ने कहर फैलाया न होता चीन सा आके भारत में करता ये तांडव जो घंटा घंटी ढोल शंख बजाया न होता कोरोना का बायरस फैलता ही जाता जो सोशल डिस्टेंस को बनाया […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

क्या गुजरती है मेरे साथ बताऊँ कैसे हर किसी को मैं नजर आऊँ तो आऊँ कैसे एक पल के लिए भी चैन कहाँ है मुझको दिल से किसी से मैं लगाऊँ तो लगाऊँ कैसे पेश करने के लिए कुछ भी नहीं अश्कों के सिवा घर किसी को मैं बुलाऊँ तो बुलाऊँ कैसे नींद को भाता […]

गीतिका/ग़ज़ल

बाजारी रहेगी

ये जब तक उनमें बीमारी रहेगी सियासत की तरफदारी रहेगी हम उसमें ढूंढते ही सच रहेंगे वो बातें सिर्फ अखबारी रहेगी ग़रीबों से कहां का वास्ता है तुम्हारी बस अदाकारी रहेगी रहेंगे जब तलक नस्लों के झगड़े जहां तक हो महामारी रहेगी दिखाएंगे भला हम क्या हुनर को अगर हर चीज बाज़ारी रहेगी नज़र से […]

गीतिका/ग़ज़ल

मैं चली हूँ हमेशा सम्हल कर

मैं चली हूँ हमेशा सम्हल कर अब देखूंगी काँटों पे चल कर रौशन मैं तिमिर को करूंगी भले मिट जाऊँ बाती सी जल कर उफ्फ तक न करूंगी सफर में पीर बह जाये चाहे पिघल कर तुझमें मैं ढली धीरे-धीरे सीख ली मैं हुनर खुद में गल कर कभी तो मेरी भी होगी पूजा ज़रा […]