गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़िन्दगी इतनी उदास क्यूं है भटकती हुई-सी आस क्यूं है । सब कुछ है दिखावटी,नकली, खोखला इस कदर हास क्यूं है । दूर-दूर तक है फैली खामोशी, ग़मगीन हर दिवस,मास क्यूं है । शंका के बादल छाये गगन पर, सिसकता यहां विश्वास क्यूं है । कितने हैं ज़िन्दा,कहना कठिन, चलती-फिरती हर लाश क्यूं है । […]

गीतिका/ग़ज़ल

सुनो किसी दयार में

कभी तो हमसे तुम मिलो,सुनो किसी दयार में कहो कभी मन की कही सुनो किसी दयार में।। जो बात दिल में है कहो ,कहो कहो न चुप रहो दिल टुकड़े टुकड़े हो रहा सुनो किसी दयार में।।  ये रात फिर न आएगी ये बात कह न पाओगे कसम वसम सब तोड़ दो सुनो किसी दयार […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में बाक़ी नहीं अब शराफत। कहाँ तक सुधारेगी उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम नफासत। करेगा वतन की जो पूरी हिफाज़त। उसे ही मिलेगी अवामी हिमायत। उन्हे हार मिलती ज़माने में हर सू, समय की समझते नहीं जो नज़ाकत। मुहब्बत का जज़्बा रहेगा जो दिल में, रहेगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी और कभी अहले खुदा की बातें दोस्ती और कभी अहदे-वफा की बातें कभी खुशबू कभी मौसम कभी ये वादे-सबा जिस तरफ देखिए बस तेरी अदा की बातें जिन्दगी-मौत कभी चाँद-सितारे-सूरज धूप-बरसात कभी काली-घटा की बातें दर्द अहसास घुटन टीस कराहें चीखें बेबसी जुल्म तिरस्कार बला की बातें प्यार इसरार इशारों की जुबाँ खामोशी साज […]

गीतिका/ग़ज़ल

जान देंगे वार तुम पे ऐ वतन

  जान देंगे वार तुम पे ऐ वतन। करते हैं हम प्यार तुमसे ऐ वतन। अब तिरंगा हिन्द का लहरायेगा , अनवरत बेख़ौफ़ नभ में ऐ वतन। याद है कुर्बानियाँ हर लाल की, व्यर्थ हम जाने न देंगे ऐ वतन। माओं के आँखों में जो भी थे पले, देंगे कर साकार सपने ऐ वतन। दे […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहा गीतिका

“दोहा गीतिका” री बसंत क्यों आ गया लेकर रंग गुलाल कैसे खेलूँ फाग रस, बुरा शहर का हाल चिता जले बाजार में, धुआँ उड़ा आकाश गाँव घरों की क्या कहें, राजनगर पैमाल।। सड़क घेर बैठा हुआ, लपट मदारी एक मजा ले रही भीड़ है, फुला फुला कर गाल।। कहती है अधिकार से, लड़कर लूँगी राज […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फिर  मुझे  तेरी  ज़बानी    चाहिए। एक  सुन्दर  सी  कहानी    चाहिए। वाम दक्षिण हो चुका किस्सा बहुत, अब  मईसत   दरमियानी   चाहिए। भूल कर  किस्से  पराजय के सभी, फिर से किस्मत आज़मानी चाहिए। देश की जब आन का हो मसअला, देश  की  इज्ज़त  बचानी   चाहिए। काल कोरोना कभी जब खत्म हो, फिर से धरती जगमगानी  […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

आज आंखों में आंसू उतर आए। जैसे शाम को भूला कोई घर आए। कई सदियां बीत गई जैसे, और फिर वही रहगुजर आए। उस अजनबी को देखा तो सिलसलेवार, हो ताजा याद ग़म -ए- सफ़र आए। याद आते ही वो एक नाम, बस आंखों में शिकन उभर आए। भूला बैठे हैं हम खुद को ही, […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहा गीतिका

“दोहा गीतिका” मुट्ठी भर चावल सखी, कर दे जाकर दान गंगा घाट प्रयाग में, कर ले पावन स्नान सुमन भाव पुष्पित करो, माँ गंगा के तीर संगम की डुबकी मिले, मिलते संत सुजान।। पंडित पंडा हर घड़ी, रहते हैं तैयार हरिकीर्तन हर पल श्रवण, हरि चर्चा चित ध्यान।। कष्ट अनेकों भूलकर, पहुँचें भक्त अपार बैसाखी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

थक गये  जल्द  आज़ार  से। दिख रहे  सख्त   बीमार  से। देख   लेना  ज़रा  मुल्क  भी, जब  मिले  वक्त  व्यापार से। तूल  उनको  न  दो  भूलकर, हल करो  मसअले  प्यार से। हाथ खाली दिखे  भक्त सब, क्या मिला उनको दरबार से। बख़्श  दे  हो  सके  तो सुकूं, चाहिए  कुछ  न   संसार से। — हमीद कानपुरी