Category : गीतिका/ग़ज़ल


  • तुम बिन डसता दिन

    तुम बिन डसता दिन

    तुझ बिन मेरा पहला-दिन, बेहद सूना-सूना निकला दिन। था सब कुछ पहले जैसा पर, मुझे लगा बदला-बदला दिन। हर पल तुझको ढूंढ़ रहा था, पागल सा मैं और पगला दिन। घोर उदासी के सन्नाटों में, गुजरा...

  • कहानी भी ख़तम होगी।

    कहानी भी ख़तम होगी।

    कहानी जो, शुरू थी वो, कहानी भी, ख़तम होगी। निशानी का, करोगे क्या, निशानी भी, ख़तम होगी।। नही कुछ भी बचा रहता ज़माने का यही सच है, नई को क्या कहोगे तुम पुरानी भी ख़तम होगी।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    होनी थी जितनी बारिश-ए-इकराम हो चुकी अब आओ घर को लौट चलें शाम हो चुकी किस्सा-ए-गम अपना उनको जब लगा कहने बोले वो ये खबर तो कब की आम हो चुकी पहने हुए थी शर्म का...

  • कहाँ आ गए हम

    कहाँ आ गए हम

    दिल को लगाके कहाँ आ गए हम? तुम्हें आजमा के कहाँ आ गए हम? ख़ुशी है ज़ियादा नहीं ग़म भी कम है, रिश्ते निभाके कहाँ आ गए हम? बड़े दिलजले हैं मुहब्बत शहर में, पते को...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हिंदी    है   मनभावन   गंगा, हिंदी   सुंदर   सावन   गंगा। हिंदी  भाषा अजर- अमर है, हिंदी  सदा सुहागन   गंगा।। हिंदी   सबकी  पावन  वाणी, संस्कारों   का  उपवन गंगा।। एक    सूत्र    में  बाँधे  हिंदी, ज्यों  बहती है ...

  • गीतिका

    गीतिका

    जिंदगी में हर समय मुश्किल घड़ी तैयार है बेवजह मुख मोड़ लेना मान लीजै हार है ! कंटको की राह पर तू पग बढ़ाना सीख ले ये ज़रूरी तो नहीं के हर गली गुलज़ार है !...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिसके ज़ख्म पे मैंने सदा मरहम लगाया है, मेरी पीठ पर उस शख्स ने खंजर चलाया है करो तवाफ-ए-काबा या लगाओ गंगा में डुबकी, ना होगा कुछ अगर तूने किसी का दिल दुखाया है वक्त के...