Category : गीतिका/ग़ज़ल

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चाह कर भी मुझको भुला न पाओगे, मेरी वफ़ा को दिल से मिटा न पाओगे। मेरी तरफ से तुम आजाद हो अब से, मेरी यादों से कैसे जुदा हो पाओगे। जिस तरफ देखोगे नजर मैं ही...

  • बेटियाँ

    बेटियाँ

    बेटियाँ बेटियाँ हैं हसरतें दिल की कली- छोड़ दूजे घर बसें दस्तूर है | प्रेम के रस में पगी रस घोलती- ये दुआ रब की खुदा का नूर हैं | बेटियों से गूँजता है आँगना –...

  • गजल

    गजल

    गज़ल _____________________________ सलीके से छुपा रहीं हर अज़ाब आपका हैं ये मुस्कुराहटें या हिजाब आपका शाद हुस्न बेरहम क़यामती निगाह है कत्ल कर गया मेरा ये शबाब आपका इकअदा में है कज़ा इक अदा में जिंदगी...

  • गीतिका

    गीतिका

    समांत-अना पदांत-पूनम की है रात मौसम बड़ा सुहावना, पूनम की है रात। जागी मन में भावना, पूनम की है रात। पिया गए परदेस को, मनवा उठे हिलोर। कब आओगे साजना, पूनम की है रात। कैसे बीते...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी अपने लिए कुछ शौक पाल जीना था, मौत का ज़िंदगी से डर निकाल जीना था। क्यूं अपने मन को मार इतने दिनों जीता रहा, क्या तुझको थी ये ख़बर कितने साल जीना था। बाद तेरे...

  • गीतिका

    गीतिका

    खंड खंड आकाश देखिए रिश्तो का संत्रास देखिए रक्त जनित सारे रिश्तो में दरक रहा विश्वास देखिए भाई की जड भाई काटता करता है उपहास देखिए भावुक मन निरद्वंद भटकता रहता सदा निराश देखिए जाने कब...

  • आँखे

    आँखे

    आँखे ****** हाय दिल को लुभा गयी आँखे | रोग दिल का लगा गयी आँखे | नींद पलकों से गुम हुयी अब तो – ख्वाब लाखों सजा गयीं आँखें | तीर ऐसा चला नज़र का था...


  • तुम वही हो क्या

    तुम वही हो क्या

    जिसको चाहा था तुम वही हो क्या? मेरी हमराह ज़िंदगी हो क्या? कल तो हिरनी बनी उछलती रही क्या हुआ आज थक गई हो क्या? ऐ बहारों की बोलती बुलबुल क्यों हुई मौन बंदिनी हो क्या?...

  • गज़ल

    गज़ल

    मेरे जज़्बात से बिल्कुल ही बेखबर निकला मेरा महबूब संगदिल किस कदर निकला मुझे लगा था कि दो – चार बूँदें होंगी बस छोटी सी आँख में अश्कों का समंदर निकला दोबारा तुझसे न हो पाई...