गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ख़ामोश सुब्ह के मंज़र हैं शाम ख़ामोशी, हर एक रास्ता हर इक मक़ाम ख़ामोशी । ख़बर किसे थी कि ऐसा भी वक़्त आएगा, करेगी  ज़ीस्त का  जीना हराम ख़ामोशी । न जाने कौन सी मंज़िल पे जा के ठहरेगी फ़िज़ा में तैरती ये बे लगाम ख़ामोशी। हमारे क़ल्ब के सुनसान एक गोशे ने, रखा है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आंँधियों से लड़ रहा है दीप इक जलता हुआ, हौसलों से जीत मुमकिन पाठ ये पढता हुआ। साथ मेरे चल के देखो पाओगे मंज़िल सदा, वक्त गुज़रा पास से इक बात ये कहता हुआ, जिसकी लहरों में किनारे और हैं मंझधार भी, वो समंदर मेरे भीतर हर घड़ी बहता हुआ। कल गुलाबों की बड़ी नज़दीकियांँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

भूलों का पछतावा कर ले। बात सीख की मन में धर ले।। बोता कीकर बीज रोज़ तू, खारों से निज दामन भर ले। करनी का फ़ल मिले ज़रूरी, वैतरणी के पार उतर ले। अहंकार सिर पर सवार है, इसकी भी तो खोज खबर ले। अपना दोष और पर टाले, ये घर छोड़ दूसरा घर ले। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आदमी की छाँव से बचने लगा है आदमी। आदमी को देखकर छिपने लगा है आदमी।। आँख से दिखता नहीं महसूस भी होता नहीं, क्या बला यों आग से तपने लगा है आदमी मूँ दिखा पाने केलायक रह न पाया शख्स ये चश्म दो अपने झुका झिपने लगा है आदमी। हाथ धो पीछे पड़ा आतंक का […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नहीं खुद को यूँ बेख़बर रख के चल सफ़र में है मुश्किल नज़र रख के चल .. उजाले भी होंगे मुख़ातिब कभी न दिल में अँधेरे का डर रख के चल .. बुरा वक्त भी बीत ही जायेगा जरा सा तो दिल में सबर रख के चल .. बनेंगें सभी काम बिगड़े तेरे दुआओं में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – ले गया था

वो आंखों का भी मंज़र ले गया था मेरा आंसू समंदर ले गया था कभी उसकी ज़मींदारी रही थी गया तो सिर्फ बिस्तर ले गया था ये सच है जीत ली थी उसने दुनिया मगर फिर क्या सिकंदर ले गया था अजब उल्फत उसे महबूब से थी लगा जो सर पे पत्थर ले गया था […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो चिट्ठियों का दौर पुराना हो गया, जबसे मोबाइल से याराना हो गया। खत्म हुई बातें इन्तजार की खत के, अब तो रूबरू इश्कियाना हो गया। निगाहें दर पर डाकिये का इन्तजार, वह किस्सा गुजरा जमाना हो गया। पढ़ते थे वह भी जो लिखा ही नहीं, छिप छिपकर पढ़ना फसाना हो गया। कितनी बार भिगोया […]

गीतिका/ग़ज़ल

अनकहा

कुछ कहा, बहुत कुछ अनकहा रह गया। साथ साथ चले,मगर फासला रह गया। उठी थी काली घटायें,बरसे भी थे बादल, तुम थे रुठे रूठे,ये सावन प्यासा रह गया। हुए है इस तरह जुदा की, मिल न पायेंगे, फिर क्यूँ बाकी ये,यादों का सिलसिला रह गया। थी रात दीवाली की,हर घर रोशन चराग थे, किसे फिक्र,क्यूँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

रहनुमां

हमसफर समझा था जिनको, रहनुमां साबित हुए । ख़ामोश तन्हा रहगुज़र का, काफ़िला साबित हुए। बड़ी बेवज़ह ठहरी हुई थी, गुमशुदा सी जिंदगी, वो बने हमदर्द क्या, बस  खुशनुमा साबित हुए। दिल था मुरझाया कहीं, खोया गुज़िश्ता वक्त में, डूबने को नाव थी, वो नाखुदा साबित हुए । था निगाहों से हमारे, दिल तलक कोहरा […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

ग़ज़ल

चूड़ियां तेरी सदा खन-खन करे प्रियतमा पासा तू’ अब गर मन करे | रात दिन भगवान का चिंतन करे हाथ जोड़े ईश का वंदन करे | रब इबादत शांति से कर लो सभी प्रार्थना मन को सदा पावन करे | बाग़ में दावत जरूरत तो नहीं गुल खिले हों तो भ्रमर गुंजन करे | घोषणा […]