गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

जो चाहिए वो ही नहीं मिलती समन्दर  से नदी नहीं मिलती चाँदनी रात भी और संदली हवा भी सरदी में  केवल रजाई नहीं मिलती बदल गए चेहरे  कितने काश्मीर के कभी झेलम कभी राबी नहीं मिलती सब छीन लिया कंप्यूटर मोबाइल ने अब  कलमों को स्याही नहीं मिलती ग़म, धोखा, फरेब, तिजारत, रुसवाई मोहब्बत  में […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

सिलसिला ये क्यों हुआ जाता है,अब क्या कीजिये? अजनबी से दिल जुड़ा जाता है,अब क्या कीजिये? खींच लूं अपने कदम उस ओर मंजिल बेनिशाँ, फिर भी दिल ऐसे उड़ा जाता है,अब क्या कीजिये? जिंदगी और मौत के दरम्यान का ये फासला, और भी ज्यादा हुआ जाता है,अब क्या कीजिये? राब्ता है तो मेरा बस अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जुबाँ-जुबाँ की साला गाली। दीवारें ज्यों आला वाली।। खोखल करता साला घर को, मिश्री-सी मधुबाला साली। सोचे बिना जुबाँ पर बसता, जुबाँ न होती ताला वाली। पत्नी का कहलाता भाई, जीभ नुकीली भाला वाली। क़ानूनन वह भाई जैसा, बहता प्रेम – पनाला खाली। जीजाजी के घुटने छूता, जीजी ने गलमाला डाली। ‘शुभम’ सार से हीन […]

गीतिका/ग़ज़ल

बहार नहीं है

सच का ये संसार नहीं है,खुशियों का व्यापार नहीं है। लोग यहाँ जो कसमें खाते,खाने को आहार नहीं है। सभी चाहते प्यारी दुल्हन ,पर बेटी स्वीकार नहीं है। ख़ुशी नहीं मिलती उस घर में ,जिस घर में मनुहार नहीं है। जहाँ खड़ी नफरत दीवारें,उस घर में अब प्यार नहीं है। राख के ढेर बहुत हैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मर्ज़ हरगिज़ दया नहीं करता। वक़्त पर जो दवा नहीं करता। जग से डरता नहीं कभी यूँ मैं, काम कोई बुरा नहीं करता। मेरे नेचर में एक भारी पन, काम हल्के किया नहीं करता। मेरी सीरत गुलाब जैसी है, बद महक यूँ दिया नहीं करता। फिर हक़ीक़त कहाँ पता चलती, ठीक से जो पता नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बाहर देखा, देखा अन्दर फिर भूखे का भूखा मन। सुन्दरता के लेकर मन्ज़र फिर भूखे का भूखा मन। ध्रती, अम्बर, दौलत, शोहरत, प्यार-मुहोब्बत लेकर भी, फिर ना मानें एैसा कंजर फिर भूखे का भूखा मन। अपने दिल की हर एक इच्छा पूरी करके बैठा है, फिर भी जाता है यह मन्दर फिर भूखे का भूखा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ना तेरा एतबार रहा अब और ना रहा सत्त्कार। खण्डित-खण्डित कर दिए हैं सब सज्जन-दुश्मन-यार। तीखी जिहवा जब भी चलती ख़ून खराबे करती, बेशक म्यान में बंद रहती है दो धारी तलवार। शीतल आँसुओं के भीतर फूटे एक क्रान्ति, लेकिन शांत समन्दर से ही उठता है मंझधार। मोह ममता तो पंख लगाकर उड़ गए दूर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर तरह दिल को मानना होगा। यार  का  जो  भी फैसला होगा। वो  घड़ी  खास  हो  गयी  होगी, दीप जब आस का जला  होगा। मुझको अच्छी  तरह  पता  है ये, उस तरफ का जवाब क्या होगा। बात  को  मानना  नहीं  उसको, इससे ज़्यादा खराब क्या होगा। दिल मेरा तोड कर  उसे भी तो, दर्द  महसूस […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

जीने की एक ही ख्वाहिश थी वो भी जला दी हमने जब आज हँसके तुम्हारी ‘हां’ में ‘हां’ मिला दी हमने वैसे तो हम भी तन्हा थे और तुम भी तन्हा मिली थी पर दोस्ती से प्यार तक जाते जिंदगी  दिला दी हमने कभी कभी तुम्हे बेबकूफियाँ करके रुलाया तो लगा हँसानी थी जो जिंदगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

साथ छोड़ मेरा तन्हा ही चलने वाले हम नहीं बदले और बदल गए बदलने वाले मां जिल में मुश्किलों से घबरा गए वो क्यो चल दिए उन पर फिर चलने वाले माटी इंतजार में माटी ही रही उनके लिए कहाँ गए उसको मूरत में बदलने वाले उसके गमों ने जहां के पत्थरों को पिघला दिया […]