Category : गीतिका/ग़ज़ल

  • कातिलों के शहर में

    कातिलों के शहर में

    मुमकिन सज़ा-ए-मौत या वजह खुदखुशी मिले। कातिलों के शहर में, अब कैसे ज़िन्दगी मिले।। किस्मत की बात यार है, जो मिले कबूल कर। क्यों फिरे यहाँ वहाँ कैसे ही एक खुशी मिले।। हर शय नसीब है,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आ के बैठा  हूँ किनारे आ सको तो पास आओ। मन तुझे ही बस पुकारे आ सको तो पास आओ। एक पल सोया नहीं हूँ  रात भर जागा तेरे बिन, हैं  गवाही   में  सितारे  आ सको...


  • आहटें चौखटों तक

    आहटें चौखटों तक

    आहटें, चौखटों तक अब मेरी, आती कम हैं। औ’ हवाएं भी खिड़कियों को हिलाती कम हैं।। गलियाँ सूनी, बदमिज़ाज़ सड़कें हो चली जब। मेरी आँखें भी इंतज़ार सजाती कम हैं।। वजह कोई और होगी, आँख ये...

  • गज़ल

    गज़ल

    हर तरफ बस तू ही तू हो जा उठा नकाब, रूबरू हो जा ================== या किसी की आरज़ू कर ले या किसी की आरज़ू हो जा ================== मुहीत-ए-बेकरां से मिलना है मिटा खुद को आबजू हो...

  • गज़ल

    गज़ल

    सोचता हूँ कि महफिलों से किनारा कर लूँ यादों को ही तनहाई का सहारा कर लूँ ============================ मैंने चाहा है अपनी जान से भी ज्यादा जिसे अब उसे गैर के साथ कैसे गवारा कर लूँ ============================...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरे भीतर कोई खुशबू का बिखर जाता है मुझको उस वक्त उजाला सा नजर आता है सीप की पलकों पे मोती से छलक आते हैं जब अनाड़ी कोई दरिया में उतर जाता है डूबती आस को...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बड़ी  बे  अदब  है   चुनावी  सियासत। बुराई  की  करते  फिरें  सब  हिमायत। सियासत में बाक़ी नहीं अब  शराफत। कहाँ तक  सुधारेगी  उसको अदालत। दिखावे की हरगिज़ नहीं है  इजाज़त। दिखाते फिरो मत यहाँ तुम  नफासत। करेगा ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरी कहानी को कोई अंजाम मिल न पाया तूने भेजा था जो मुझको वो पैगाम मिल न पाया मिला तो बहुत कुछ है लेकिन ये लग रहा है हकदार था मैं जिसका वो ईनाम मिल न...

  • बजट के बतोले

    बजट के बतोले

    नहीं मिल सका आम जनता को कुछभी, हमें   बस   सुनाये    बजट   के   बतोले। किया   तेल   महँगा   भरी   ज़ेब  अपनी, हमें   कुछ  न  भाये   बजट   के  बतोले। बताये   है   शेयर   का  बाज़ार  गिरकर, तनिक  भी   न ...