गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इक रोज़ कहीं गुज़र न जाऊँ मैं प्यार बग़ैर मर न जाऊँ बस एक निगाह पुरमुहब्बत फिर देख अगर सँवर न जाऊँ तू याद मुझे सदा रहेगा मैं यार तुझे बिसर न जाऊँ वो भी कि ज़बान ही चलाते मैं भी कि निबाह पर न जाऊँ आराम हराम हो गया है बेचैन बवाल कर न […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

रखना संभल के पाँव, पटा धुंध से शहर है। अब आदमी कहाँ रहा, हैवान का कहर है। ये नोंच लेगें बोटियां, नरनुमा अमानुष। रक्खो छुपा के हुस्न, दरिन्दों का शहर है। हिस्सों में है जज्बात, जब हो जिस्मफरोशी । दंगा  है, लूटपाट  है, जंगल सा शहर है। हर चौक पर नेता  हैं, और गुंडे शहर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल”इक शामियाना चाहिए”

सिर छिपाने के लिए, इक शामियाना चाहिएप्यार पलता हो जहाँ, वो आशियाना चाहिए राजशाही महल हो, या झोंपड़ी हो घास कीसुख मिले सबको जहाँ, वो घर बनाना चाहिए दाँव भी हैं-पेंच भी हैं, प्यार के इस खेल मेंइस पतंग को, सावधानी से उड़ाना चाहिए मुश्किलों से है भरी, ये ज़िन्दग़ानी की डगरआखिरी लम्हात तक, रिश्ता […]

गीतिका/ग़ज़ल

दिलरुबा…

ये कौन आ गई दिलरूबा महकी महकी । फिज़ा महकी महकी हवा महकी महकी ।। वो आंखों में काजल वो बालो में गजरा, हथेली पे उसके जो हिना महकी महकी । खुदा जाने किस किस की ये जान लेगी, वो क़ातिल अदा वो कज़ा महकी महकी । लाज की हल्की लालिमा चेहरे पे छुपाए हुए, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी पलकों का हर आंसू हथेली में छुपा लूं आ तुम्हारे दर्द को मैं अपने कलेजे से लगा लूं आ बहुत काटी है रो रो कर तुमने रातें अकेले में सुना कर गीत कोई मैं तुमको सुला लूं आ। नई कोई बात छेड़ो तुम नई को बात हम छेड़े वो जो दर्द में गुज़रे वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़मज़दा आंखों का दो बूंद नीर कैसे बचे? ऐसे हालात में अपना ज़मीर कैसे बचे? धर्म के नाम पे तालीम दोगे बच्चों को? मुझको इस बात की चिंता कबीर कैसे बचे? एक भी कृष्ण नहीं, अनगिनत दुःशासन हैं आज की द्रौपदी का बोलो चीर कैसे बचे? हर तरफ घात लगाए हैं लुटेरे बैठे ऐसी सूरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

क्यों कलम

क्यों कलम , मुझे इतना आज़माती क्यों कलम , मुझे जीना ना सीखाती।। कलम मैं बनी तेरे हाथ की कठपुतली जैसा चाहे , मुझे कलम वैसा नचाती।। मेरे जज़्बात दिल पर जब दस्तक देते कलम कान लगा , सुनके सब लिख जाती।। कभी तो कलम मुझे मेरे हाल पर छोड़ो मेरे हालत देख तुम तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

मत करो लापरवाही

थोड़ी-सी लापरवाही कर जाती है तबाही समय रहते अन्याय का प्रतिकार न किया तो देते रहो ताउम्र दुहाई कभी जज छुट्टी पर होगा कभी सामने वाली पार्टी नहीं आई कभी मूल (ओरिजिनल) कागज मांगे जाएंगे कभी तलब की जाएगी गवाही समय अनुकूल होगा तो मिल सकती है अन्याय से रिहाई वरना काम नहीं आती कोई […]

गीतिका/ग़ज़ल

शीत

धुंध छाई,लुप्त सूरज,शीत का वातावरण, आदमी का ठंड का बदला हुआ है आचरण। रेल धीमी,मंद जीवन,सुस्त हर इक जीव है, है ढके इंसान को ऊनी लबादा आवरण। धुंध ने कब्जा किया,सड़कों पे,नापे रास्ते, ज़िन्दगी कम्बल में लिपटी लड़खड़ाया है चरण। पास जिनके है रईसी,उनको ना कोई फिकर, जो पड़े फुटपाथ पर,उनका तो होना है मरण […]

गीतिका/ग़ज़ल

कोई न छल दे

क्यों करती हो? भरोसा इन पापियों पर बोलो!  कोई ना न छल दे! तुझको ऐसी नजर से तोलो!  कब थमेगी? यह कहानी जो बना अभिशाप है!  प्रेम को बदनाम करके कर रहे जो पाप हैं|  संस्कारों को भुलाकर भूलकर परिवार को|  भूल जाते क्यों बताओ? मां पिता के प्यार को|  जिंदगी के इस  सफर में […]